Jammu and Kashmir wins first ever Ranji Trophy title: टी20 विश्व कप की धूम के बीच जम्मू-कश्मीर ने शनिवार (28 फरवरी) को रणजी ट्रॉफी का पहला खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। जम्मू-कश्मीर ने हुबली में खेले गए फाइनल में कर्नाटक को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराया। जानिए किन खिलाड़ियों का रहा सबसे अहम योगदान।
Jammu and Kashmir wins first ever Ranji Trophy title: एक तरफ टी20 विश्व कप (T20 World Cup 2026) के रोमांच में पूरा देश डूबा हुआ था, दूसरी तरफ कर्नाटक के हुबली में भारतीय क्रिकेट के नए दौर को आगाज की कहानी लिखी जा रही थी। शनिवार (28 फरवरी) की दोपहर जब केएससीए स्टेडियम में दोनों कप्तानों देवदत्त पड्डिकल और पारस डोगरा ने हाथ मिलाया, तो जम्मू-कश्मीर की टीम ने 67 साल के इंतजार के बाद अपना पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीत लिया। आठ बार के चैंपियन और स्टार स्टडेड कर्नाटक को पहली पारी में 291 रनों की बढ़त के आधार पर हराकर जम्मू-कश्मीर रणजी ट्रॉफी के 92 साल के इतिहास में खिताब जीतने वाली 18वीं टीम बन गई है। ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच जब खिलाड़ियों ने कप उठाया, तो कई आंखें नम हो गई।
औकिब नबी डार (गेंदबाज - 29 वर्ष)
इस सीजन में 60 विकेट लेकर रणजी ट्रॉफी 2025-26 के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज, और डोड्डा गणेश और जयदेव उनादकट के बाद रणजी इतिहास में 60 या उससे अधिक विकेट लेने वाले तीसरे तेज गेंदबाज बने। फाइनल में औकिब ने कर्नाटक के खिलाफ 54 रन देकर 5 विकेट हासिल किए, जिसमें केएल राहुल, मयंक अग्रवाल और करुण नायर जैसे बड़े नाम शामिल थे। सीजन में यह उनका सातवां पांच विकेट हॉल था।
शुभम पुंडीर (बल्लेबाज, 27 वर्ष)
फाइनल की पहली पारी में 247 गेंदों पर 121 रन की पारी खेलकर इस युवा बल्लेबाज ने जम्मू-कश्मीर की टीम को 584 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाया। यह इस सीजन में उनका दूसरा, और करियर का चौथा प्रथम श्रेणी शतक था। शुभम ने यावर हसन के साथ दूसरे विकेट के लिए 139 रनों की अहम साझेदारी की, जो कर्नाटक से मैच को बहुत दूर ले गई।
कामरान इकबाल (बल्लेबाज, 24 वर्ष)
कामरान को विनिंग स्क्वॉड में शामिल किए गए जाने की कहानी काफी दिलचस्प है। उन्हें सेमीफाइनल में चोटिल हुए शुभम खजूरिया की जगह आधी रात को फाइनल के लिए बुलाए गया और सुबह वे मैदान पर उतरे। कामरान ने फाइनल की दूसरी पारी में नाबाद 160 रन बनाकर अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली, जिसने कर्नाटक की बची-खुची उम्मीदों को भी दफन कर दिया।
साहिल लोत्रा (बल्लेबाज, 27 वर्ष)
कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में साहिल ने पहली पारी में 72 और दूसरी पारी में नाबाद 101 रन बनाए। यह उनका पहला फर्स्ट क्लास शतक था। कामरान के साथ मिलकर साहिल दूसरी पारी में टीम को 342/4 तक ले गए, जिससे जीत सुनिश्चित हुई।
पारस डोगरा (कप्तान और बल्लेबाज, 41 वर्ष)
जीवन के चार दशक खामोशी से खेलते हुए भारतीय क्रिकेट की सेवा करने के बाद पारस डोगरा आखिरकार जम्मू-कश्मीर को उनके पहले रणजी खिताब तक ले जाने वाले कप्तान बन चुके हैं। फाइनल की पहली पारी में पारस ने 70 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। सेमीफाइनल में बंगाल के खिलाफ अर्धशतक लगा वे वसीम जाफर के बाद रणजी ट्रॉफी इतिहास में 10,000 रन पूरे करने वाले दूसरे खिलाड़ी बने।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाने के लिए खुद हुबली पहुंचे। यह खिताब सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि बारामुला से पुलवामा तक, जम्मू से कारगिल तक के लाखों क्रिकेट प्रेमियों के सपनों की जीत है।