Sachin Tendulkar Birthday: सचिन तेंदुलकर आज 24 अप्रैल को अपना 53वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। आज उनके जन्मदिन पर उनको भेज गए खास मैसेज के साथ उनके 100 शतकों के सफर पर एक नजर डालते हैं।
Sachin Tendulkar Birthday: सचिन तेंदुलकर आज 24 अप्रैल को अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। क्रिकेट के भगवान कहे जाने सचिन ने यूं तो सैकड़ों बड़े रिकॉर्ड बनाए। लेकिन, 100 इंटरनेशनल शतक रिकॉर्ड एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे शायद ही कभी कोई तोड़ पाए। अगस्त 1990 में उन्होंने पहला इंटरनेशनल शतक और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मार्च 2012 में उनके बल्ले से जब 100वां शतक आया। आज उनके बर्थडे के मौके युवराज सिंह ने सबसे पहले उनके लिए खास मैसेज पोस्ट किया है। वहीं, बीसीसीआई और मुंबई इंडियंस समेत तमाम फैंस ने अपने एक्स अकाउंट से सचिन के लिए स्पेशल मैसेज पोस्ट किए हैं। आज हम आपको इन खास मैसेज के साथ उनके 100 शतकों के सफर के बारें बताते हैं।
पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'जन्मदिन मुबारक पाजी! आपके साथ मैदान साझा करना मेरे लिए सम्मान की बात थी, लेकिन आपसे सीखना उससे भी बड़ी बात थी। आपका अनुशासन, विनम्रता और प्यार हम सभी के लिए एक मिसाल है! उन यादों और उस प्रेरणा के लिए धन्यवाद, जो आप आज भी हमारे लिए बने हुए हैं। ढेर सारा प्यार!
सचिन तेंदुलकर ने कुल 100 इंटरनेशनल शतक बनाए, जिनमें से 51 टेस्ट मैचों में और 49 वनडे मैचों में आए थे। सचिन के शतकों का सफर 17 साल की उम्र में शुरू हुआ था और आखिरी शतक 38 साल की उम्र में बनाया था। उन्होंने अपना पहला शतक 9 अगस्त 1990 को ओल्ड ट्रैफ़र्ड में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एक ड्रॉ टेस्ट मैच में लगाया था। उस मैच में तेंदुलकर ने 119 रन बनाकर नाबाद रहे थे। वहीं, उनका 100वां शतक 16 मार्च 2012 को मीरपुर में बांग्लादेश के खिलाफ आया, जिसमें उन्होंने 114 रन बनाए थे।
सचिन ने 20 साल का होने से पहले पांच इंटरनेशनल शतक बना लिए थे। फिर 20 से 24 साल की उम्र के बीच 25 और शतक बनाए। इसके बाद 25 से 29 साल की उम्र के बीच 35 शतक बनाए। ये उनके करियर के सबसे शानदार और सफल साल थे। फिर 30 से 34 साल की उम्र के बीच 16 शतक बनाए।
फिर पूरी लगन और जिद के साथ 35 साल की उम्र के बाद 19 और शतक बनाए। यह आखिरी आंकड़ा ऐसा है, जिसे ज्यादातर विश्लेषक और विशेषज्ञ रुके नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। क्योंकि 35 साल की उम्र के बाद ज्यादातर बल्लेबाजो का करियर लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका होता है।