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सचिन तेंदुलकर ने की जसप्रीत बुमराह की तारीफ, बताया दुनिया का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज

फाइनल मैच में मैन ऑफ द मैच रहे बुमराह चार ओवरों में 14 रन देकर लिए दो विकेट सचिन ने कहा काफी परिपक्व हो गए हैं बुमराह
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सचिन तेंदुलकर ने की जसप्रीत बुमराह की तारीफ, बताया दुनिया का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज

हैदराबाद : मुंबई इंडियंस ने फाइनल में चेन्नई सुपर किंग्स को एक रन से हराकर आईपीएल के खिताब पर कब्जा जमाया। मुंबई की इस जीत में जसप्रीत बुमराह का सबसे बड़ा योगदान रहा। इस वजह से उन्हें मैन ऑफ द मैच करार दिया गया। मैच के बाद पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने इस गेंदबाज की जमकर तारीफ की। उन्होंने बुमराह को आज के समय का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बताया।
बुमराह ने खिताबी मुकाबले में चार ओवर में 14 रन देकर दो विकेट हासिल किए, जबकि आईपीएल-12 में उन्होंने 16 मैचों में 6.63 की इकोनॉमी रेट से कुल 16 विकेट लिए।

कहा- बुमराह का सर्वश्रेष्ठ आना बाकी

मैच के बाद मुंबई इंडियंस के एक और सीनियर खिलाड़ी और सचिन तेंदुलकर के साथ टीम इंडिया में खेल चुके युवराज सिंह ने उनका साक्षात्कार लिया। इस साक्षात्कार में सचिन ने बुमराह को दुनिया का बेहतरीन गेंदबाज बताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अभी बुमराह का सर्वश्रेष्ठ आना बाकी है।

काफी परिपक्व गेंदबाज हो गए हैं बुमराह

युवराज से पहले सचिन ने मुम्बई इंडियंस टीम के कोच माहेला जयवर्धने और टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर तथा कमेंटेटर संजय मांजरेकर से भी बात की। इस दौरान उन्होंने बुमराह की क्रिकेटीय समझ की तारीफ की। उन्होंने कहा कि दो मौकों पर जब उनके साथी गेंदबाज क्रुणाल पांड्या और लसित मलिंगा ने काफी रन लुटा दिए तब बुमराह अपनी सटीक गेंदबाजी से फिर टीम को दोबारा पटरी पर ले आए। उन्होंने मांजरेकर से बातचीत करते हुए कहा कि वह काफी परिपक्व गेंदबाज हो गए हैं। इस मैच में उनकी परिपक्वता चरम पर थी। हमें याद करना होगा कि लसिथ मलिंगा और क्रुणाल पांड्या के ओवर में काफी रन चले गए थे और मैच मुम्बई के हाथ से फिसल गया था, लेकिन डेथ ओवरों में अपने दो ओवरों में कसी गेंदबाजी से बुमराह मुम्बई को वापस मैच में ले आए।

बुमराह ने कहा- संयम बनाए रखा

25 साल के युवा खिलाड़ी ने मैन ऑफ मैच का अवॉर्ड लेने के बाद कहा कि वह जानते थे कि फाइनल मैच है और मुकाबला कांटे का होगा। उन्हें मुम्बई के लिए खिताब जीतना था, क्योंकि यह खास पल होता। इसीलिए हमने संयम बनाए रखा। वह टीम की सफलता में योगदान देना चाहते थे। इसलिए खुद को विचारशून्य नहीं होने दिया। वह गेंद दर गेंद रणनीति बनाकर चल रहे थे। ऐसा करने से दबाव कम रहता है।

Published on:
13 May 2019 05:38 pm