
Yuvraj Singh on Team India World Cup 2027: टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने रोहित शर्मा के वनडे वर्ल्डकप 2027 में खेलने की चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की है। 2011 वर्ल्डकप के प्लेयर ऑफ द मैच रहे युवराज सिंह ने वर्ल्डकप 2027 के लिए टीम में बड़े बदलाव न करने की सलाह दी है। युवराज सिंह ने कहा कि आईसीसी की ट्रॉफी जीतने के लिए लंबे समय तक टीम में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जो पिछले हार मिली है, उसकी वजह अचानक टीम में बदलाव रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है कि चयनकर्ताओं को अभी से 16 से 20 खिलाड़ियों का एक ग्रुप बनाना चाहिए, जो वर्ल्ड कप पर फोकस करें।
आईसीसी क्रिकेट वर्ल्डकप 2027 की मेजबानी साउथ अफ्रीका के साथ जिंबॉब्वे और नामीबिया मिलकर करने जा रहे हैं। इससे पहले साउथ अफ्रीका ने 2003 वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी, जहां भारतीय टीम फाइनल पहुंची थी। 2023 में भी भारतीय टीम फाइनल में पहुंची थी, लेकिन उनका खिताब जीतने का सपना ऑस्ट्रेलिया ने तोड़ दिया था और 2003 में भी ऑस्ट्रेलिया ने ही खिताब जीतने का सपना तोड़ा था। ऐसे में एक बार फिर से भारतीय टीम खिताब जीतने के इरादे से साउथ अफ्रीका जाएगी। उससे पहले टीम इंडिया के दो सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा और विराट कोहली के करियर पर भी तलवार लटकी हुई है।
युवराज सिंह ने कहा है कि 50 ओवर के गेम में कोर ग्रुप को लगातार मैच खेलने का मौका देने से उनका आत्मविश्वास मजबूत होता है। उन्होंने कहा है कि साउथ अफ्रीका की पिच पर तेज गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर्स की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। ऐसे में हार्दिक पंड्या की फिटनेस पर नजरें होंगी।
युवराज सिंह ने चयनकर्ताओं को सलाह दी है और बताया कि उन्हें मुख्य रूप से ऐसे मैच विनर को चुनने पर ध्यान देना चाहिए, जो अकेले अपने दम पर मैच का रुख बदल देने की क्षमता रखते हैं, भले उनके पास दूसरी स्किल हो या ना हो। युवराज सिंह ने बताया कि टूर्नामेंट से पहले बड़े बदलाव करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा है कि जब भी भारत लड़खड़ाया है, तब ऐसा हुआ है जब आखिरी समय पर बदलाव किए गए हैं। मुझे लगता है कि यह जरूरी है कि हम टीम पर भरोसा बनाए रखें, जो वर्ल्ड कप जीत सकती है। उस समय तक उन खिलाड़ियों का साथ दें, भले वह फेल हों या पास। टीम पर भरोसा होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा है कि वनडे वर्ल्डकप में सफलता के लिए ऑस्ट्रेलिया के पुराने तरीकों पर ध्यान देना चाहिए, जो लगातार जीत रही है। वह अपनी टीम में अलग-अलग मैच विनर रखते हैं, जो अकेले दम पर मैच जीत सकते हैं और मुश्किल समय में एकजुट होकर खेल सकते हैं। टीम इंडिया ने 1983 के बाद दूसरा वर्ल्डकप 2011 में जीता लेकिन उसके बाद अब तक इंतजार खत्म नहीं हुआ है।