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फर्जी पासपोर्ट कांड: 20-20 हजार में दलाल ने बनवाए 10, भोपाल पासपोर्ट कार्यालय की साठगांठ पर उठे सवाल

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 70 बांग्लादेशी घुसपैठियों के पासपोर्ट बनवाने वाले नेटवर्क की परतें अब तेजी से खुल रही हैं। स्पेशल टास्क फोर्स ने भोपाल से पासपोर्ट दलाल नसीम अख्तर को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया है कि उसने मास्टरमाइंड रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु से 20-20 हजार रुपए लेकर 10 पासपोर्ट बनवाने का सौदा किया था। इनमें से 8 पासपोर्ट से जुड़ा रिकॉर्ड नसीम के ई-मेल अकाउंट से बरामद हुआ है। एसटीएफ अब यह जांच कर रही है कि नसीम ने रियाल चौधरी के लिए कुल कितने पासपोर्ट बनवाए और इसमें पासपोर्ट कार्यालय के किन कर्मचारियों की भूमिका रही।
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Sep 18, 2026
Fake passport
Fake passport

ग्वालियर. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 70 बांग्लादेशी घुसपैठियों के पासपोर्ट बनवाने वाले नेटवर्क की परतें अब तेजी से खुल रही हैं। स्पेशल टास्क फोर्स ने भोपाल से पासपोर्ट दलाल नसीम अख्तर को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया है कि उसने मास्टरमाइंड रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु से 20-20 हजार रुपए लेकर 10 पासपोर्ट बनवाने का सौदा किया था। इनमें से 8 पासपोर्ट से जुड़ा रिकॉर्ड नसीम के ई-मेल अकाउंट से बरामद हुआ है। एसटीएफ अब यह जांच कर रही है कि नसीम ने रियाल चौधरी के लिए कुल कितने पासपोर्ट बनवाए और इसमें पासपोर्ट कार्यालय के किन कर्मचारियों की भूमिका रही। रियाल ने यह सभी फर्जी पासपोर्ट 2023 में बनवाए हैं इनमें भोपाल के अन्नानगर में अशोक बौद्ध विहार का पता लिखा है। जबकि सिमरिया डबरा के पते पर पासपोर्ट 2022 में बने हैं। नसीम पहले भी फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने के मामले में नागपुर पुलिस के हाथों गिरफ्तार हो चुका है। पूछताछ में सामने आया कि रियाल चौधरी ने भोपाल के अशोका विहार स्थित बौद्ध विहार के पते पर करीब 40 पासपोर्ट बनवाने का ठेका लिया था। उसने नसीम को 10 कथित बौद्ध भिक्षुओं के नामों की सूची देकर पासपोर्ट बनवाने के लिए 20-20 हजार रुपए दिए थे। एसटीएफ डीएसपी सुनीता रावत के अनुसार, नसीम ने पासपोर्ट कार्यालय में पदस्थ पांच-छह कर्मचारियों के नाम बताए हैं, जो कथित रूप से पैसे लेकर आवेदन आगे बढ़ाने में मदद करते थे। इन कर्मचारियों की भूमिका और लेन-देन की जांच की जा रही है।

टीआइ विनायक और आरक्षक भूपेंद्र तलब
डबरा के सिमरिया गांव, अंबेडकर पार्क और तथागत बुद्ध विहार के पते पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बने थे। कई आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज था। इसके बावजूद पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट प्रक्रिया में यह गंभीर विसंगति पकड़ में नहीं आई। इसी मामले में तत्कालीन डबरा थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर को गुरुवार को एसटीएफ मुख्यालय तलब किया गया। उनसे पूछा गया कि एक ही पते और मोबाइल नंबर पर कई लोगों के आवेदन का सत्यापन कैसे कर दिया गया।


धर्म की आड़ में तैयार किया नेटवर्क
पूछताछ में रियाल और उसके साथियों ने बताया कि बांग्लादेश में पासपोर्ट बनवाना संभव नहीं था। इसलिए वे बौद्ध भिक्षु का चोला पहनकर भारत आए और बौद्ध मठों में ठहरते रहे। धार्मिक कार्यक्रमों से मिली रकम का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट बनवाने में किया गया।


कई नाम सामने आए, दोषियों की पहचान होगी
फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने वाला दलाल भोपाल से पकड़ा गया है। मास्टरमाइंड रियाल चौधरी ने उसके जरिए कुल कितने पासपोर्ट बनवाए हैं इसका पता लगाया जा रहा है। इसमें पासपोर्ट विभाग के कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं। डबरा से फर्जी दस्तावेजों के जरिए 17 पासपोर्ट कैसे बने थे इसका पता लगाने के लिए तत्कालीन डबरा थाना टीआइ विनायक शुक्ला और सिपाही भूपेन्द्र गुर्जर को तलब किया था।
राहुल लोढा डीआइजी एसटीएफ भोपाल

Updated on:
18 Sept 2026 05:47 pm
Published on:
18 Sept 2026 05:46 pm