हाईकोर्ट में जम्मू-कश्मीर सरकार ने अपना पक्ष और मजबूत रखने के लिए वक्त मांगा है।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप और उसके बाद उसकी हत्या के मामले में सीबीआई जांच की मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। हालांकि राज्य सरकार की तरफ से ये संकेत दिए जा चुके हैं कि इस केस में सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है और राज्य पुलिस बखूबी केस की जांच कर रही है। वहीं इस बीच सोमवार को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में कठुआ मामले की सीबीआई जांच को लेकर सुनवाई हुई। तमाम दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अब सुनवाई को अगले सप्ताह के लिए टाल दिया है।
हाईकोर्ट में एक हफ्ते के लिए टली सुनवाई
सोमवार को हुई सुनवाई में जम्मू-कश्मीर की महबूबा सरकार ने अपने पक्ष मजबूत से रखने के लिए अदालत से और समय मांगा है, जिसकी वजह से ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी है। कठुआ मामले की सीबीआई जांच करवाने के लिए हाईकोर्ट में एक वकील वीनू गुप्ता ने याचिका दायर की है। पीड़िता की ओर से कोर्ट में पेश हुईं वकील ने राज्य सरकार द्वारा अपनी प्रतिक्रिया न दे पाने को लेकर आलोचना की। पीड़िता की वकील ने कहा कि यह मुफ्ती सरकार की इस मामले को लेकर गंभीरता को दर्शाता है।
पीड़िता की वकील ने की महबूबा की आलोचना
साथ ही वकील वीनू गुप्ताह ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के उस ताजा बयान की भी आलोचना की, जिसमें मुफ्ती ने कहा है कि मामले की सीबाआई से जांच करवाए जाने की कोई जरूरत नहीं है। आपको बता दें कि एक दिन पहले ही महबूबा मुफ्ती ने ये कहा था कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की कोई जरूरत नहीं है, अगर लोगों को राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं है तो किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
महबूबा ने सीबीआई जांच ना करवाने के दिए थे संकेत
महबूबा मुफ्ती के इस बयान को लेकर पीड़िता की वकील ने कहा कि ये मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में राज्य की मुख्यमंत्री को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था। महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम के अधिकारियों पर उनके धर्म या उनके क्षेत्र के आधार पर सवाल उठाना शर्मनाक और खतरनाक है'। उन्होंने यह भी कहा कि अपराध होने पर उसकी जांच के लिए टीम गठित करने के लिए हम हर बार जनमत नहीं करा सकते।
वहीं दूसरी तरफ सोमवार को इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में इस केस का ट्रायल जम्मू-कश्मीर से बाहर कराने की मांग की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कठुआ मामले को अब पठानकोट ट्रांसफर कर दिया गया है।