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Rigorous Imprisonment: बेटे को पेड़ पर उल्टा लटकाया, फिर पीट-पीटकर मार डाला, पिता-पुत्र को मिली 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा

Rigorous Imprisonment: 2 वर्ष पूर्व पिता-पुत्र ने मिलकर वारदात को दिया था अंजाम, गंभीर हालत में इलाज के दौरान हो गई थी मौत, कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

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Rigorous imprisonment

Surajpur court (Photo- Patrika)

सूरजपुर। सूरजपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम पर्री में 2 वर्ष पूर्व एक युवक (Rigorous Imprisonment) को पेड़ पर उल्टा लटका कर पिता व भाई ने बेदम पिटाई की थी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस प्रकरण में सुनवाई पूरी होने के बाद दोष सिद्धि होने पर तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी पिता-पुत्र को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है।

बता दें कि 26 मई 2024 को ग्राम पर्री निवासी जगरनाथ को उसके पिता रामभरोस व भाई शिवचरण घर के बाहर आम पेड़ में उल्टा लटका कर पिटाई (Rigorous Imprisonment) कर रहे थे। जब अन्य परिजन बचाव के लिए वहां पहुंचे तो दोनों किसी को नजदीक नहीं आने दे रहे थे। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो जगरनाथ जख्मी अवस्था में पेड़ पर लटका हुआ था तथा पिता और भाई डण्डा लिए मौजूद थे।

पूछने पर पिता-भाई ने बताया कि हमेशा बहुत परेशान करता था, इसलिए मारपीट कर उल्टा लटकाए हैं। इसके बाद जगरनाथ को उतारकर संजीवनी 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस (Rigorous Imprisonment) ने धारा 302 व 34 के तहत अपराध दर्ज किया।

मामले की विवेचना थाना प्रभारी सूरजपुर विमलेश दुबे द्वारा की गई। इस दौरान पुख्ता साक्ष्य संकलित करते हुए आरोपी ग्राम पर्री निवासी रामभरोस सिंह पिता हरकलाल उम्र 55 वर्ष व उसके बेटे शिवचरण सिंह उम्र 33 वर्ष को गिरफ्तार कर आरोप पत्र तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय सूरजपुर (Rigorous Imprisonment) में पेश किया।

Rigorous Imprisonment: कोर्ट ने सुनाई 10-10 साल की सजा

प्रकरण का संचालन अपर लोक अभियोजक केके नाविक द्वारा किया गया। इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश डायमंड कुमार गिलहरे तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने आपराधिक मानववध का अपराध प्रमाणित पाए जाने पर पिता-पुत्र को धारा 304, 34 बीएनएस के तहत 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) से दंडित किया है।

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