6 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मुंबई: तरबूज खाने से मौत मामले की जांच अटकी, 10 दिन बाद भी नहीं सुलझ पाया ‘जहर’ का रहस्य

Mumbai Watermelon Food Poisoning Death: मुंबई के पायधुनी (Pydhonie) इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ आया है।

3 min read
Google source verification

मुंबई

image

Dinesh Dubey

May 06, 2026

Watermelon food poisoning Mumbai Pydhonie

तरबूज या कुछ और! 10 दिन बाद भी परिवार की मौत का कारण ‘अज्ञात’

मुंबई के पायधुनी इलाके में डोकाडिया परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौत का कारण 10 दिन बाद भी ‘अज्ञात’ है। इस बीच, जांच में बड़ी रूकावट आने की खबर है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने खुलासा किया है कि पर्याप्त मात्रा में सैंपल उपलब्ध नहीं होने के कारण माइक्रोबायोलॉजिकल जांच नहीं हो पा रही है। ऐसे में यह पता लगाना और मुश्किल हो गया है कि पति, पत्नी और उनकी दो बेटियों की मौत फूड पॉइजनिंग, बैक्टीरियल संक्रमण, जहर या किसी अन्य वजह से हुईं है।

यह मामला 25 अप्रैल का है, जब दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके में रहने वाले डोकाडिया परिवार के चार सदस्यों की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी। मृतकों में अब्दुल्ला डोकाडिया (44), उनकी पत्नी नसरीन (35) और बेटियां आयशा (16) व जैनब (13) शामिल थीं।

तरबूज खाने के बाद बिगड़ी थी हालत

परिजनों और अधिकारियों के अनुसार, परिवार ने 25 अप्रैल की रात दस बजे के करीब अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ चिकन बिरयानी खायी थी, उसके बाद देर रात करीब 1 बजे तरबूज खाया था। इसके कुछ ही समय बाद सभी की तबीयत खराब होने लगी। सुबह होते-होते उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई, जिसके बाद उन्हें जेजे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन एक-एक कर चारों की मौत हो गई।

घटना के बाद, उनके घर से एकत्र किए गए खाद्य पदार्थों और पानी के नमूनों को जांच के लिए भेजा गया। हालांकि शुरुआती जांच में किसी तरह की मिलावट के संकेत नहीं मिले। एफडीए ने बताया कि शुरुआती जांच में खाने-पीने की चीजों में कोई भी जहरीला या हानिकारक पदार्थ नहीं मिला है।

सैंपल की कमी बनी बड़ी बाधा, नहीं हो सकी बेहद जरुरी जांच

एफडीए अधिकारियों ने बताया कि माइक्रोबायोलॉजिकल जांच के लिए तय मानकों के अनुसार सैंपल की पर्याप्त मात्रा जरूरी होती है।

नियमों के मुताबिक, सैंपल (नमूने) को तीन अलग-अलग लैब में भेजना अनिवार्य होता है। हर लैब के लिए सैंपल के 5 हिस्से लिए जाते हैं, यानी कुल 15 सैंपल भाग तैयार किए जाते हैं। इसमें भी हर हिस्से का वजन कम से कम 125 ग्राम होना चाहिए।

लेकिन पायधुनी मामले में घर से मिले तरबूज, खाने के नमूने, पानी और मसालों की मात्रा बेहद कम थी। पानी केवल कुछ मिलीलीटर में उपलब्ध था, जबकि मसालों की मात्रा न के बराबर थी।

एक अधिकारी ने बताया, लैब को माइक्रोबायोलॉजिकल जांच के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन सैंपल की पर्याप्त मात्रा नहीं होने के कारण जांच नहीं हो सकी।

अब भी स्पष्ट नहीं मौत की वजह

फिलहाल मामले में मौत का अंतिम कारण सामने नहीं आया है। जेजे अस्पताल की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। अधिकारियों के अनुसार, हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच अभी लंबित है और चिकित्सकीय राय भी रिपोर्ट आने तक सुरक्षित रखी गई है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में 'जहर' का संकेत

जहां एक ओर एफडीए की जांच सैंपल्स की कमी के कारण अटकी है, वहीं पोस्टमॉर्टम की शुरुआती रिपोर्ट ने मामले को और रहस्यमयी बना दिया है। बताया जा रहा है कि शवों के आंतरिक अंगों में 'असामान्य हरापन' था, जबकि अब्दुल्ला डोकाडिया के शरीर में 'मॉर्फिन' के अंश मिले हैं। जो एक तरह की दर्द निवारक दवा है। डॉक्टरों का मानना है कि यह मौत सामान्य फूड पॉइजनिंग की नहीं है, बल्कि किसी घातक रासायनिक पदार्थ या जहर के कारण हुई हो सकती है।

क्यों जरूरी थी माइक्रोबायोलॉजिकल जांच?

विशेषज्ञों के मुताबिक, संदिग्ध फूड पॉइजनिंग मामलों में माइक्रोबायोलॉजिकल जांच बेहद अहम होती है। इससे बैक्टीरिया, वायरस या टॉक्सिन जैसे खतरनाक तत्वों का पता लगाया जा सकता है, जो सामान्य केमिकल जांच में सामने नहीं आते।

अधिकारियों का कहना है कि बिना इस जांच के यह साबित करना बेहद मुश्किल हो जाता है कि मौतें खाद्य संक्रमण की वजह से हुईं या नहीं। यानी इससे पता चल जाता कि डोकाडिया परिवार की मौत हादसा थी या कोई साजिश। फिलहाल पुलिस, एफडीए और मेडिकल टीम की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।