क्राइम

ग्वालियर : आशियानों के बीच बाजार, छिना कॉलोनियों का सुकून, अवैध अस्पताल, कोचिंग, दुकानों पर हाईकोर्ट सख्त

शहरवासियों ने जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर रिहायशी कॉलोनियों में आशियाना इसलिए बनाया था ताकि वे शहर के शोर-शराबे और ट्रैफिक से दूर सुकून और शांति से रह सकें। लेकिन नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के भ्रष्ट व लापरवाह सिस्टम ने इन शांत कॉलोनियों को भीड़भाड़ वाले अनियंत्रित कंक्रीट के बाजार में तब्दील कर दिया है।
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Oct 13, 2026
colony peace
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ग्वालियर. शहरवासियों ने जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर रिहायशी कॉलोनियों में आशियाना इसलिए बनाया था ताकि वे शहर के शोर-शराबे और ट्रैफिक से दूर सुकून और शांति से रह सकें। लेकिन नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के भ्रष्ट व लापरवाह सिस्टम ने इन शांत कॉलोनियों को भीड़भाड़ वाले अनियंत्रित कंक्रीट के बाजार में तब्दील कर दिया है। मकानों के भीतर धड़ल्ले से चल रहे अवैध अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, होटलों, वेयरहाउसों और डिलीवरी स्टोर्स के इस गंभीर मर्ज पर अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन, नगर निगम आयुक्त, स्मार्ट सिटी सीईओ, ग्वालियर विकास प्राधिकरण और एमपी हाउसिंग बोर्ड को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब तलब किया है। अदालत के इस कड़े रुख से कॉलोनियों में अवैध रूप से कारोबार चला रहे भू-माफियाओं और उन पर मेहरबान अफसरों में हड़कंप मच गया है।

न फायर एनओसी, न पार्किंग: बड़े हादसे का अंदेशा
आवासीय कॉलोनियों में चलने वाले इन अवैध संस्थानों के पास न तो अपनी कोई अधिकृत पार्किंग है और न ही सुरक्षा के इंतजाम।

  1. अवैध पार्किंग का विवाद: दिनभर ग्राहकों और छात्रों के वाहनों के कारण कॉलोनियों के गेट जाम रहते हैं, जिससे रहवासियों और वाहन चालकों के बीच आए दिन विवाद और मारपीट की नौबत आती है।
  2. आग बुझाने का रास्ता नहीं: इन तंग गलियों में चल रहे निजी अस्पतालों और बहुमंजिला कोचिंग सेंटरों में सैकड़ों जिंदगीयां दांव पर लगी हैं। अधिकांश के पास न तो फायर सेफ्टी एनओसी है और न ही कोई आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट)। यदि कोई अनहोनी या अग्निकांड हुआ, तो दमकल गाड़ियों का मौके तक पहुंचना भी नामुमकिन होगा।

30 फीट की सड़कें बनीं पार्किंग, रहवासियों का जीना मुहाल

  • याचिका में शहर की कॉलोनियों की बदहाली का दर्द बयां करते हुए बताया गया कि मास्टर प्लान और जोनिंग नियमों को ताक पर रखकर रिहायशी भूखंडों पर धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
  • इन इलाकों में सबसे बुरा हाल: शहर के पटेल नगर, दीनदयाल नगर, गोंविददपुरी, आदर्श पुरम, आदित्य पुरम, विनय नगर और चेतकपुरी से वसंत विहार मार्ग पर रिहायशी मकान पूरी तरह कमर्शियल शोरूम, कैफे, कोचिंग और वेयरहाउस में बदल चुके हैं।-ट्रैफिक का चक्काजाम: गोंविददपुरी ट्रैफिक लाइट के आसपास और अंदरूनी गलियों में खुले ई-कॉमर्स डिलीवरी स्टोर्स और दुकानों के सामने हर समय 40 से 50 दोपहिया-चारपहिया वाहन खड़े रहते हैं। नतीजतन, 30 फीट चौड़ी सड़कें आधी से ज्यादा घिर जाती हैं और एंबुलेंस तक का निकलना नामुमकिन हो जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की नजीर, लापरवाह अफसरों पर भी नकेल की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसलों (राजेंद्र कुमार बरजात्या बनाम यूपी आवास एवं विकास परिषद व अन्य) का हवाला देते हुए मांग की गई है कि रिहायशी क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को तुरंत सील किया जाए। साथ ही, कॉलोनी विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले उन जिम्मेदार इंजीनियरों और अफसरों के खिलाफ भी आपराधिक व दंडात्मक कार्रवाई की जाए, जिन्होंने जेबें भरकर इन अवैध निर्माणों पर वर्षों से अपनी आंखें मूंद रखी थीं।

Updated on:
13 Oct 2026 05:57 pm
Published on:
13 Oct 2026 05:51 pm