क्राइम

निर्भया केसः चार में एक दोषी पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, पवन ने फाइल की SLP

सुप्रीम कोर्ट में किया दावा कि अपराध के वक्त वह था नाबालिग। दिल्ली हाईकोर्ट के ऊपर इस तथ्य को नजरअंदाज करने का लगाया आरोप।

2 min read
nirbahya case convicts

नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस में शुक्रवार को एक ओर तो पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों का दोबारा डेथ वारंट जारी किया। हालांकि दूसरी तरफ दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि अभी फांसी देना संभव नहीं है क्योंकि चारों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में लूट का एक मामला लंबित है। वहीं, इसके बाद एक दोषी पवन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष याचिका (SLP) दायर की है। इसके बाद लगता है कि अभी भी दोषियों की फांसी की तारीख आगे बढ़ सकती है।

16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली में निर्भया के साथ की गई दरिंदगी के दोषियों को एक बार फिर से पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने आगामी 1 फरवरी की सुबह 6 बजे चारों दोषियों को फांसी देने का डेथ वारंट जारी किया।

लेकिन इसके बाद केस के चार दोषियों अक्षय, विनय, मुकेश और पवन में से एक पवन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख किया। पवन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) दायर की। इस याचिका में पवन ने दावा किया है कि जिस वक्त यह अपराध हुआ, वह नाबालिग था और दिल्ली हाईकोर्ट ने इस तथ्य को दरकिनार किया।

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट मामले को लेकर मीडिया से बातचीत में दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा, "तिहाड़ जेल प्रशासन ने एक तथ्य छिपाया है कि लूट के एक मामले में दोषियों की अपील अभी भी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। जब तक लूट के मामले का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक इनको फांसी नहीं दी जा सकती।"

दरअसल अगस्त 2015 में दिल्ली की एक अदालत ने राम आधार नामक एक बढ़ई से लूट के एक मामले में फांसी की सजा पाने वाले चारों दोषियों को दोषी ठहराया था। निर्भया के दोषियों ने इस घटना को 16 दिसंबर 2012 की रातगैंगरेप से कुछ देर पहले ही अंजाम दिया था।

दोषियों ने राम आधार को लूटा और पीटने की कोशिश की और उन्हें 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद दोषियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक अपील दायर की थी, जो अभी तक लंबित है।

Updated on:
18 Jan 2020 10:26 am
Published on:
17 Jan 2020 08:57 pm
Also Read
View All