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जयपुर मर्डर केस: भाई गवाही से मुकरा तो लगा बच निकलेगा पिता का कातिल, लेकिन इस एक चूक से मिली उम्रकैद

अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-7 (महानगर द्वितीय) ने पिता के गले पर कैंची से वार कर हत्या करने वाले बेटे आशीष प्रजापत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

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जयपुर

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Arvind Rao

May 16, 2026

Jaipur Court Verdict

पिता की हत्या करने वाले बेटे को उम्रकैद की सजा (पत्रिका फाइल फोटो)

Jaipur News: जयपुर की एक अदालत ने पिता की बेरहमी से हत्या करने वाले बेटे को सख्त सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-7 (महानगर द्वितीय) ने कैंची से वार कर पिता की जान लेने वाले आरोपी बेटे आशीष प्रजापत को आजीवन कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी की।

न्यायाधीश ने कहा, उपलब्ध परिस्थितियों से यह पूर्णतः सिद्ध है कि अभियुक्त ने ही अपने पिता की जघन्य हत्या की है। अतः ऐसे अपराधी के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।

जानें क्या है पूरा मामला?

अपर लोक अभियोजक रमेश चंद ने अदालत को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला पिछले साल का है। 8 अप्रैल, 2025 को मृतक के एक बेटे प्रदीप प्रजापत ने मुरलीपुरा थाने में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पिता रमेश प्रजापत अक्सर शराब पीने के आदी थे और शराब पीकर घर में लड़ाई-झगड़ा करते थे।

घटना वाले दिन यानी 7 अप्रैल की शाम को प्रदीप के पास उसके भाई आशीष का फोन आया था। फोन पर आशीष ने खुद स्वीकार किया कि उसने पिता की हत्या कर दी है। जब प्रदीप भागकर घर पहुंचा, तो उसने देखा कि पिता रमेश लहूलुहान हालत में फर्श पर पड़े हुए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट पेश किया था।

भाई के पलटने के बावजूद सबूतों से साबित हुआ गुनाह

इस मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता भाई प्रदीप अपने बयानों से पलट गया। उसने अपने ही भाई के खिलाफ गवाही देने से इनकार कर दिया, जिस पर अदालत ने उसे पक्षद्रोही घोषित कर दिया।

हालांकि, अदालत ने केवल गवाह के बयानों पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक और ठोस सबूतों को प्राथमिकता दी। न्यायालय ने पुलिस द्वारा जुटाए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और फॉरेंसिक सबूतों को बारीकी से देखा। कोर्ट ने पाया कि अपराध की कड़ियां आपस में पूरी तरह जुड़ती हैं, जिससे साफ पता चलता है कि हत्या आशीष ने ही की है। इसी मजबूत आधार पर कोर्ट ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई।