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Jaipur Family Court Verdict: ‘I Love You Jaan’ बना तलाक की वजह, 10 साल पुरानी शादी खत्म

फैमिली कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा गैर पुरुष संग रोमांटिक फोटो पोस्ट करना और ‘आई लव यू जान’ जैसे कमेंट्स वैवाहिक क्रूरता है। सबूतों के आधार पर कोर्ट ने 10 साल पुरानी शादी रद्द कर दी।

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जयपुर

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Arvind Rao

May 01, 2026

Jaipur Family Court Verdict

Jaipur Family Court Verdict (Patrika File Photo)

जयपुर: वैवाहिक संबंधों में वफादारी और मर्यादा को लेकर जयपुर के फैमिली कोर्ट नंबर-1 ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी विवाहित महिला द्वारा सोशल मीडिया पर किसी अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक तस्वीरें साझा करना और खुद को 'अविवाहित' बताना पति के प्रति मानसिक क्रूरता है।

बता दें कि कोर्ट ने इस आधार पर एक युवक की तलाक की याचिका को स्वीकार करते हुए 10 साल पुरानी शादी को खत्म कर दिया है। दरअसल, जयपुर निवासी एक युवक और युवती का विवाह 27 नवंबर 2015 को हुआ था।

पति का आरोप था कि शादी के अगले दिन से ही उसकी पत्नी का व्यवहार असामान्य था। विवाद बढ़ने पर अक्टूबर 2017 से दोनों अलग रहने लगे। पति ने अदालत में याचिका दायर कर बताया कि उसकी पत्नी का किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध है और वह सोशल मीडिया पर उसके साथ आपत्तिजनक व रोमांटिक तस्वीरें पोस्ट करती है।

'आई लव यू जान' जैसे कमेंट्स बने आधार

पति की ओर से पैरवी कर रहे वकील डीएस शेखावत ने कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश किए। इन सबूतों में पत्नी की अन्य पुरुष के साथ ऐसी तस्वीरें थीं, जिन पर उस व्यक्ति ने 'आई लव यू जान' और 'भावी पत्नी' जैसे कमेंट्स किए थे। पति ने दलील दी कि पत्नी ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर खुद को अनमैरिड घोषित कर रखा था, जो वैवाहिक गरिमा के विरुद्ध है।

अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक दिखने वाली तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना न केवल वैवाहिक संबंधों के लिए घातक है, बल्कि यह क्रूरता की श्रेणी में आता है। चाहे वह पुरुष महिला का रिश्तेदार हो या दोस्त, इस तरह का कृत्य वैवाहिक दुर्व्यवहार और शादी का अपमान है।

पत्नी के दावों को कोर्ट ने नकारा

बचाव में पत्नी ने तर्क दिया कि जिस आईडी से फोटो पोस्ट की गई, वह उसकी नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने सवाल उठाया कि अगर आईडी फर्जी थी, तो महिला ने उस व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई?

महिला ने यह भी दावा किया कि फोटो में दिख रहा व्यक्ति उसका 'जीजा' है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि वह रिश्तेदार था, तो उसे गवाही के लिए अदालत में पेश क्यों नहीं किया गया? साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने माना कि आईडी पत्नी की ही थी और वह जानबूझकर ऐसी गतिविधियां कर रही थी।

माता-पिता से अलग रहने का दबाव भी 'क्रूरता'

केस की सुनवाई के दौरान पति ने मोबाइल चैट और मैसेज भी पेश किए। इनसे साबित हुआ कि पत्नी अपने पति पर उसके माता-पिता को छोड़कर अलग रहने का दबाव बनाती थी और बात न मानने पर धमकियां देती थी। कोर्ट ने अपने फैसले में जोड़ा कि पति को उसके बुजुर्ग माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करना भी मानसिक क्रूरता है।

सहमति देकर मुकरना पड़ा भारी

मामले में एक मोड़ तब आया जब पहले दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दी थी। पति ने इसके एवज में 5 लाख रुपए का डीडी भी कोर्ट में जमा कराया था। लेकिन बाद में पत्नी ने बिना किसी ठोस कारण के अपनी सहमति वापस ले ली। कोर्ट ने इसे 'दुर्भावनापूर्ण आचरण' करार देते हुए कहा कि सहमति वापस लेने के अधिकार का इस्तेमाल मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता।

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