
ग्वालियर. धर्म की आड़ में देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले बांग्लादेशी पासपोर्ट कांड में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। डबरा के सिमरिया (वार्ड-1) से 6 घुसपैठियों के पासपोर्ट बनवाने में स्थानीय मास्टरमाइंड गुलाबराय गौतम उर्फ सम्यक बोधि भंते का असली चेहरा सामने आया है। पूछताछ में पता चला है कि गुलाबराय को हर फर्जी पासपोर्ट के बदले कमीशन मिलता था, जिसे घुसपैठियों का सरगना रियाल चौधरी दान के रूप में देता था। यह केवल एक व्यक्ति की जालसाजी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की उस गहरी सुस्ती और लापरवाही का नतीजा है, जिसने महज 96 घंटों के भीतर विदेशी नागरिकों को भारतीय होने का प्रमाण-पत्र थमा दिया।
रियाल को बताया असली खिलाड़ी, खुद को मोहरा
खुद को फंसता देख अब गुलाबराय सारा ठीकरा रियाल चौधरी पर फोड़ रहा है। कहना है कि वह तो सिर्फ भरोसे में गवाही दे रहा था। हालांकि, एसटीएफ का मानना है कि गुलाबराय के खातों की जांच से उसकी काली कमाई का पूरा सच सामने आएगा। उसे पता था कि ये लोग बांग्लादेशी हैं, फिर भी उसने सरकारी तंत्र में बैठे मोहरों के जरिए यह राष्ट्रविरोधी खेल खेला।
प्रभाव का इस्तेमाल: 4 दिन में वेरीफिकेशन का खेल
गुलाबराय ने कबूला कि वह करीब 5 साल तक सिमरिया के आंबेडकर पार्क स्थित बौद्ध विहार का प्रमुख रहा। इसी दौरान रियाल चौधरी अपने साथियों के साथ वहां आया। गुलाबराय ने अपने धार्मिक और सामाजिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पुलिस और प्रशासन को गुमराह किया। उसने और उसके चेले गयाप्रसाद ने लिखित गवाही दी कि ये सभी ६ लोग सिमरिया टेकरी के पुराने निवासी हैं। प्रशासन ने भी भंते की बात पर भरोसा कर बिना बैकग्राउंड चेक के उनके आधार कार्ड, मूल निवासी और जन्म प्रमाण-पत्र आनन-फानन में तैयार कर दिए गए।
पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया और प़ुख्ता
70 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनने का खुलासा होने के बाद विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है। अब सिस्टम में सेंध लगाना आसान नहीं होगा।
बायोमैट्रिक लॉगिन: अब पासपोर्ट विभाग के कर्मचारी अपनी आइडी और पासवर्ड के साथ-साथ बायोमैट्रिक (अंगूठा) लगाने के बाद ही सिस्टम खोल पाएंगे।
लॉगिन टाइमआउट: यदि सिस्टम खोलने के बाद कर्मचारी 3 मिनट तक उस पर काम नहीं करता, तो वह अपने आप लॉगआउट हो जाएगा।
सख्त निगरानी: पासपोर्ट आवेदन की जांच अब तीन बार की जाएगी। चौथी बार जांच कराने के लिए आवेदक को अलग से फीस देनी होगी।
हेल्पलाइन अपडेट: सिस्टम में अब विशेष अधिकारियों और संबंधित थाना प्रभारियों के नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज किए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध पते पर तुरंत क्रॉस-वेरीफिकेशन हो सके।
भाषा नहीं समझ पाते थे ग्रामीण
पड़ताल में यह भी सामने आया है कि सिमरिया टेकरी और उसके आसपास बने बौद्ध विहार में कुछ साल पहले ऐसे अनजान लोग आकर ठहरे थे, जिनकी भाषा स्थानीय ग्रामीण बिल्कुल नहीं समझ पाते थे। वे कौन थे और कहां से आए थे, इसकी कोई पुख्ता जानकारी स्थानीय प्रशासन के पास नहीं थी। शातिर मास्टरमाइंड रियाल ने इस फर्जीवाड़े के लिए कोरोना काल (लॉकडाउन) का समय चुना।
नियम में कसावट
पासपोर्ट बनवाने में गड़बड़ी को रोकने के लिए कुछ समय पहले कसावट की गई है। इसमें लॉगिन करने वाले कर्मचारियों से लेकर पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वालों की निगरानी रखी गई है।
-कमल पाल, सहायक अधीक्षक मिनिस्ट्री एक्सटर्नल
अफेयर्स, ग्वालियर