
दमोह. आगामी विधानसभा के लिए एक प्रत्याशी के रूप में मुझमें क्या कमी है। मैं ही चुनाव लड़ूंगा। यह कहना था वित्त मंत्री जयंत मलैया का। प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने सतधरू योजना की पत्रकारवार्ता के दौरान विधनसभा के प्रत्याशी को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कही। दरअसल भाजपा खेमे में चर्चाएं चल रहीं थीं कि इस बार वित्तमंत्री चुनाव नहीं लड़कर अपने बेटे सिद्धार्थ मलैया को चुनाव मैदान में उतारेंगे। लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि वही इस बार भी भाजपा के प्रत्याशी होंगे। यह बात भाजपा खेमे में जंगल में आग की तरह फैल गई। भाजपा से दावेदारी की तैयारी करने वालों के चेहरे मुरझागए। दरअसल पिछले ३५ वर्षों से भाजपा की सक्रिय राजनीति करने वाले जयंत मलैया दमोह विधानसभा से हर बार भाजपा प्रत्याशी होते हैं। जो केवल एक चुनाव छोड़कर शेष चुनावों में विजयी रहे हैं। यही कारण है कि भाजपा से किसी अन्य को टिकट नहीं मिल सकी है। इस बार वित्त मंत्री का यह बयान सुनकर तो सभी भाजपाई एक बार फिर गांधी जी के तीन बंदरों का अनुसरण करते नजर आ रहे हैं।
चल रही थी तैयारी-
भाजपा के अनेक दावेदारों मे मन में था कि इस बार जयंत मलैया जो दमोह से लगातार विधानसभा के प्रत्याशी रहते हैं उन्हें केंद्रीय नेतृत्व मिलेगा। जिनके बाद अगले प्रत्याशी को दमोह विधानसभा से चुनाव लडऩे का अवसर मिल सकता है। लेकिन ऐसा नहीं होते देख सभी के अरमान धराशायी हो गए।
सक्रियता से लगा रहे थे सिद्धार्थ का अंदाज -
दमोह विधानसभा की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय रहने वाले वित्तमंत्री के बेटे सिद्धार्थ उर्फ छोना मलैया सघन दौरा कर सभी प्रमुख अवसरों पर लोगों से रूबरू होते दिखाई दे रहे थे। यही कारण है कि अधिकांश भाजपाइयों ने इस बार जयंत मलैया की जगह सिद्धार्थ को टिकट मिलने का अंदाजा लगा रखा था। अनेक दावेदारों को यह भी लग रहा था कि टिकट घर में ही जाएगी। कुछ दावेदारों ने तो अपनी दावेदारी पक्की करने कई तरह के सार्स व अपना जीवन परिचय भी तैयार कर लिया था। दमोह से भोपाल तक लगातार वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में
थे। जिनमें नए चेहरों में भले ही वह उत्साह न हो लेकिन वरिष्ठ भाजपाईयों ने तो चुनाव लडऩे के लिए दावेदारी की पूरी तैयारियां कर ली थीं। लेकिन वित्तमंत्री की पत्रकारवार्ता में आए इस बयान के बाद सभी दावेदार अब ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं।