Rajnagar Damoh
दमोह. शहर की २ लाख आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने वाला राजनगर तालाब लंबे समय हाइड्रिला (एक जलीय पौधा) से संक्रमित है। जिससे महीनों तक इससे पानी भी नहीं लिया जा रहा था, लेकिन बीते डेढ़ महीने से राजनगर से ही फिल्टर तक पानी पहुंच रहा है और इसी को फिल्टर करने के बाद घरों में पानी सप्लाई हो रहा है। पानी की बदबू और रंग को साफ करने के लिए इसके में एलम के साथ-साथ क्लोरीन, फिटकरी भी अधिक मात्रा में उपयोग की जा रही है, जिसका असर भी लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। पानी के खराबी के चलते सर्दी, जुकाम और पेट के मरीज सबसे ज्यादा दमोह शहर में देखने मिल रहे हैं। हालांकि, नगरपालिका राजनगर से सप्लाई होने के बाद भी साफ, शुद्ध पानी घरों तक सप्लाई करने का दावा कर रहा है।
दरअसल, बीते अनेक महीनों से सीधे जुझार में ब्यारमा नदी पर बने इंटेकबेल से सीधे फिल्टर प्लांट पर सप्लाई दी जा रही थी। जिसका कारण राजनगर में जमा पानी में आ रहा पीलापन और बदबू बताया जा रहा था। जिसका कारण राजनगर में हाइड्रिला का संक्रमण अधिक होना बताया जा रहा था। इसके उपचार के लिए हजारों क्विंटल चूना भी राजनगर में डाला गया, लेकिन स्थायी उपचार नहीं हो सका। ऐसे में अब राजनगर के पानी को केवल इमरजेंसी में ही उपयोग किया जा रहा था, जबकि जुझार से सीधी सप्लाई ली जा रही थी। मौजूदा समय में अमृत २.० के तहत दूसरी पाइप लाइन का काम शुरू गया है, जिसके तहत राजनगर में भी कुछ काम होना है। ऐसे में डेढ़ महीने से राजनगर का ही पानी लिया जा रहा है और आगे एक से डेढ़ महीने और इसी तालाब से पानी लिया जा सकता है।
राजनगर से पानी आने के बाद फिल्टर प्लांट पर पानी को फिल्ट्रिेट करने के लिए एलम के साथ-साथ क्लोरीन और फिटकरी को भी पानी में मिलाया जा रहा है। यह पानी में जुझार से आने वाले पानी की मात्रा में अधिक उपयोग किया जा रहा है। जिससे पानी में बदबू और रंग न रहे। बताया जाता है कि फिल्टर पर पानी पहुंचते ही फ्लेश मिक्चर में जाता है। जहां एलम मिक्स की जाती है। पानी की अनुसार एलम मिक्स की जाती है। इसके बाद फ्लेकुलेटर में पानी जाता है, ब्रिज में राउंड करता है। यहां से पानी ६ बेड बने हुए, वहां जाता है, इसमें ६ एमएम रेत से होते हुए ट्रेंच में पहुंचता है। ट्रेंच से शम्प में पानी स्टोर होता है। यहां क्लोरीन और फिटकरी डाली जाती है। आखिर में इस पानी को पंप में छोड़ा जाता है।
फिल्टर प्लांट की जिम्मेदारी भी एक एजेंसी को दी गई है। जिसके कर्मचारी रोजाना का रेकॉर्ड मेंटेन करते है। यहां कैमिस्ट भूपेंद्र के द्वारा रोजाना सुबह पानी का लैब टेस्ट किया जाता है। जिसमें पानी में मिनरल की जांच, पीएच, टीडीएस, क्लोरीनेशन की जांच होती है। इसका रेकॉर्ड भी मेंटेन किया जाता है। टेस्ट रिपोर्ट भी संबंधित अधिकारियों को भेजी जाती है। जिसे असिस्टेंट मैनेजर, केमिस्ट और लैब असिस्टेंड द्वारा साइन्ड किया जाता है।
१ करोड़ लीटर करीब रोजाना राजनगर से आ रहा है पानी।
१८ टंकी शहर की रोजाना की जाती है फिल।
२ लाख से अधिक आबादी की पूर्ति करता है पानी।
पानी शहर में शुद्ध जा रहा है। सभी टेस्ट किए जा रहे हैं। इसके बाद भी सभी एंड से पानी को टेस्ट कराया जाएगा। साथ ही पानी की शुद्धता को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। आवश्यता पडऩे पर राजनगर से सप्लाई भी बंद कर दी जाएगी।
राजेंद्र सिंह लोधी, सीएमओ नगरपालिका दमोह