दमोह

पशुपालन मंत्री लखन पटेल के ही गृह जिले में मवेशी खुद बेसहारा और लोगों के लिए आफत बने

जिले में आवारा मवेशी लगातार आफत बने हुए हैं। हालात ये हैं कि आवारा मवेशियों की रहवासी इलाकों में धमाचौकड़ी से लेकर हाइवे पर झुंड में बैठकी और खेतों में आतंक से लोग बड़ी मुसीबत का सामना कर रहे हैं।

3 min read
Sep 07, 2024

दमोह. जिले में आवारा मवेशी लगातार आफत बने हुए हैं। हालात ये हैं कि आवारा मवेशियों की रहवासी इलाकों में धमाचौकड़ी से लेकर हाइवे पर झुंड में बैठकी और खेतों में आतंक से लोग बड़ी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। ये स्थिति तब है, जब जिले के पथरिया विधायक लखन पटेल प्रदेश सरकार में पशुपालन व डेयरी विभाग के मंत्री हैं। उन्हीं के विभाग के माध्यम से मवेशियों की सुरक्षा व संरक्षण को लेकर राज्य सरकार की तमाम योजनाएं चल रहीं हैं। इसके बावजूद मंत्री लखन पटेल के ही गृह जिले में मवेशी खुद बेसहारा और लोगों के लिए आफत बने हुए हैं।
इधर प्रशासन पिछले चार महीने से आवारा मवेशियों को हटाने के दावे पर दावे कर रहा है, लेकिन प्रशासन के ये दावे मई से अगस्त बीत जाने के बावजूद अभी तक हकीकत नहीं बन पाए। कुछ समय पहले मंत्री लखन पटेल के पास आवारा मवेशियों की समस्या पहुंची। इस पर उन्होंने समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन जानकर आश्चर्य होगा कि ये समाधान भी अब तक जमीन पर नजर नहीं आया है। आवारा मवेशियों को लेकर पहले जो हाल था, वही अभी भी बना हुआ है।

शहर में लोग, तो ग्रामीण क्षेत्र में किसान परेशान

आवारा मवेशी शहर में लोगों और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए मुश्किल खड़ी कर रहे हैं। शहर में खाद्य पदार्थ व फल सब्जी की दुकानें खोलना दूभर हो गया है। पलक झपकते ही आवारा मवेशी खाने पीने सामान पर मुंह मार देते हैं। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों से फसलों की रखवाली के लिए किसानों को रतजगा करना पड़ रहा है। रखवाली में जरा सी चूक होने पर मवेशी खेतों में घुसकर फसलों को चट कर रहे हैं। पूर्व में अनेक बार ऐसा हो भी चुका है।

राहगीरों के लिए आफत, हर रोज हो रहे हादसे

जिले से निकले छतरपुर, जबलपुर, पन्ना, सागर व कटनी हाइवे पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी की बात करें, तो हर 10 किमी चलने पर लगभग 250 से ज्यादा आवारा मवेशी विचरण करते मिलते हैं। यानी औसतन हर किमी में हाइवे पर कम से कम 12 से १५ मवेशी बैठ रहे हैं। वहीं सभी हाइवे पर कुछ प्वाइंट ऐसे हैं, जहां पर स्थिति अधिक खराब है। इधर इन मवेशियों की वजह से होने वाले सड़क हादसों पर नजर दौड़ाई जाए, तो एक माह के भीतर करीब एक सैकड़ा से अधिक हादसे जिले भर में हुए। इनमें ७० फीसदी हादसों की वजह आवारा मवेशी ही बने।

इधर, मंत्री आश्वासन और प्रशासन आदेशों तक सीमित

मई में कलेक्टर ने नगरपालिका सहित जनपद पंचायतों को आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर गोशालाओं में भेजने का आदेश दिया था, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ। बीच बीच में भी कई बार कलेक्टर ने संबंधितों को निर्देशित किया पर जिम्मेदारों ने फिर भी गंभीरता से नहीं लिया। ऐसे में आदेश व निर्देश कागजों तक ही सीमित रहे। वहीं इसी बीच आवारा मवेशियों की समस्या मंत्री लखन पटेल के समक्ष पहुंची। पटेल ने कार्ययोजना बनवाकर समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ।

आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या के मुख्य कारण..

  • दूध देना बंद होते ही लोग मवेशियों को आवारा कर देते हैं। जिसमें मेल गोवंश को लोग तब तक ही घर पर रखते हैं जब तक गाय के दूध दुहने में इनकी जरूरत रहती है।
  • गोशालाएं का क्षमता के अनुसार उपयोग न होना।
  • गोचर भूमि पर कब्जे। मवेशियों को चरने के लिए जगह नहीं।
  • मवेशियों का समय समय पर बधियाकरण न होना।
  • पशुपालन के लिए प्रेरणा व जागरुकता का अभाव।

फैक्ट फाइल
28 सरकारी गौशालाएं
12 गैर सरकारी गौशालाएं
17 नई गौशालाएं निर्माणाधीन
25 हजार प्लस आवारा मवेशी

वर्जन
आवारा मवेशियों की समस्या के निराकरण को लेकर, जो कार्य योजना बनाई है उसमें तीन तरीकों को शामिल किया गया है। इनमें गोशालाओं में मवेशी भेजे जा रहे हैं, साथ ही बधियाकरण और टेकिंग का कार्य भी किया जा रहा है। यदि कहीं गोशालाएं पास नहीं हैं, तो वहां पर स्थानीय दल सड़कों से मवेशियों को खदेड़ कर हटाएगा। तीसरे उपाय में मनरेगा के तहत सड़क किनाने बाड़े बनाए जाएंगे, जिससे मवेशी सड़क पर न आ पाएं।
सुधीर कोचर, कलेक्टर

Published on:
07 Sept 2024 11:46 am
Also Read
View All

अगली खबर