विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह की गिरफ्तारी से जुड़ा मामला। महिला SDOP और जिला न्यायाधीश पर लगाए गंभीर आरोप, तो न्यायाधीश ने भी कई आरोप लगाते हुए भविष्य में उनके साथ कोई अप्रिय घटना होने शंका जताई है।
दमोह/ मध्य प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब पुलिस महकमे के आलाधिकारी और न्यायालय आमने सामने आ गए हैं। कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच आरोप प्रत्यारोपों की जंग छिड़ गई है। आपको बता दें कि, दमोह जिले हटा में सेवारथ एक महिला पुलिस (SDOP) अधिकारी ने द्वतीय अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश पर गंभीर आरोप लगाए। यही नहीं, इसकी लिखित शिकायत पुलिस महकमे के आला अधिकारियों समेत हाईकोर्ट के रजिस्टार जनरल से कर दी। यहां तक की महिला पुलिस अधिकारी ने खुद के साथ हुए व्यवहार से व्यथित होकर पुलिस सेवा से इस्तीफा देने की लिखित मंशा जाहिर कर दी। वहीं, दूसरी तरफ महिला अधिकारी की शिकायत के बाद संबंधित न्यायाधीश द्वारा भी दमोह एसपी पर आरोप लगाए गए हैं। न्यायधीश के मुताबिक, अभियुक्तों की भांति अब पुलिस अधीक्षक दमोह अपने अधीनस्थों के साथ मिलकर मेरे ऊपर झूठा और मनगणंत दबाव बना रहे हैं। यही नहीं, न्यायधीश ने अपने साथ भविष्य में किसी अप्रिय घटना होने की भी बात कही है।
महिला अधिकारी ने अपनी शिकायत में कही थी ये बात
बता दें कि, एसडीओपी हटा भावना दांगी ने द्वतीय अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश हटा कोर्ट की लिखित शिकायत करते हुए कहा कि, 'मैने 31 जनवरी 2021 को एसडीओपी हटा का प्रभार संभाला है। 6 फरवरी को वो द्वतीय अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में थाना हटा अपराध क्रमांक 143/2019 सत्र प्रकरण 30/2019 राज्य विरुद्ध राजा डॉन एवं अन्य धारा 302, 147, 148, 149, 212, 216, 294, 323, 324, 325, 326, 327, 506, 120बी, 201, 307 ताहि व धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के अभियुक्त गोविंद पिता रब्बी सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के संबंध में पैशी पर उपस्थित हुई थीं। जहां, तलाशी फरारी पंचनामा प्रस्तुत किया गया। न्यायालय के समक्ष जाकर अदम तामील गिरफ्तारी वारंट मय प्रतिवेदन व उपरोक्त दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। लेकिन मुझे न्यायालय द्वारा साढ़े चार घंटे न्यायालय में खड़ा रखा और कहा गया की आप और थाना प्रभारी आरोपियों से मिली हो। मुझे बार बार यही बात कहकर अपमानित किया गया और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया।
SDOP ने शिकायत में किया उल्लेख
बता दें कि, एसडीओपी भावना दांगी ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि, वो कोर्ट में रोने लगीं और सहम गईं थीं, क्योंकि पेशी के छह दिन पहले ही उन्होंने ज्वाइनिंग की थी और उक्त प्रकरण के बारे में उन्हें अधिक जानकारी नही थी। भावना दांगी का कहना है कि, उन्होंने इस घटना की शिकायत पुलिस महकमें सभी अधिकारियों से की है और 12 फरवरी को हाईकोर्ट रजिस्टार जनरल से शिकायत की है।
ASP ने दिया ये प्रतिवेदन
एएसपी शिवकुमार सिंह ने एसपी को लिखे गए पत्र में कहा कि, एसडीओपी हटा भावना दांगी ने 6 फरवरी को मुझसे दूरभाष पर कोर्ट के संबंध में बात की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि, 'कोर्ट ने मेरे साथ अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया, जो मेरे स्वाभिमान के खिलाफ है। मुझे अपमानित किया जाना उचित नहीं है। मुझे नौकरी नहीं करना, मैं त्याग पत्र दे रही हूं।' एएसपी शिवकुमार ने अपने प्रतिवेदन में कहा है कि, 'उक्त घटनाक्रम के संबंध में जेएमएफसी अपर सत्र न्यायालय हटा से दूरभाष पर चर्चा कर अवगत कराया था। जिस पर न्यायाधीश ने भावना दांगी को लेकर आने को कहा जिस पर मेरे द्वारा कहा गया कि, मैं महिला अधिकारी को आने के लिए दवाब नही डाल सकता।' एएसपी शिवकुमार का कहना है कि, 'यही बात उनके द्वारा 7 फरवरी को जेएमएसी अपर सत्र न्यायालय हटा से कही गई।'
ASP ने SP को दिए प्रतिवेदन में कही ये बात
एएसपी ने एसपी को दिए गए प्रतिवेदन में ये भी कहा है कि, एसडीओपी भावना दांगी को समझाइश के लिए न्यायाधीशों के समक्ष प्रस्तुत नही करने पर मेरे विरुद्ध कोई भी विपरीत टिप्पणी पारित कर सकते हैं। ज्ञात हो कि, 11 फरवरी को उक्त प्रतिवेदन एएसपी शिवकुमार द्वारा एसपी दमोह को लेख किया गया। वहीं, डीएसपी भावना दांगी प्रभारी एसडीओपी हटा ने पेशी दिनांक 6 फरवरी को ही उक्त घटना की शिकायत एसपी के सामने प्रस्तुत की थी। वहीं, भावना दांगी द्वारा बताया गया है कि, उक्त विषय की शिकायत 12 फरवरी को इनके द्वारा हाईकोर्ट के रजिस्टार जनरल के समक्ष की गई है।
अब न्यायाधीश ने आरोप लगाते हुए जताई ये आशंका
बता दें कि, संबंधित द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हटा ने जिला सत्र न्यायाधीश को 7 फरवरी को आर्डरशीट के जरिए सूचित कर अपनी बात कही है, जिसमें उन्होंने दमोह एसपी के संबंध में कहा कि, पुलिस अधीक्षक दमोह द्वारा अपने अधीनस्थों के साथ मिलकर मेरे ऊपर झूठा व मनगणंत दबाव बनाया जा रहा है, व मेरे साथ भविष्य में कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। साथ ही उन्होंने ये भी निवेदन किया कि, सत्र न्यायाधीश ठीक समझें तो उक्त सत्र प्रकरण की सुनवाई अन्य न्यायाधीश गण से कराने की कार्रवाई करें।
पथरिया विधायक रामबाई से जुड़ा है मामला
अभियुक्त गोविंद सिंह पिता रब्बी सिंह ठाकुर निवासी गौपुरा दमोह पथरिया विधायक रामबाई के पति हैं। जिन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाना है। इस मामले में जहां पुलिस महकमा राजनीतिक दवाब झेल रहा है, तो वहीं पुलिस अधिकारी न्यायालय से व्यथित होना खुद का बता रहे हैं।
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