दमोह

नहीं रहे MP के ‘कर्नाटक बाबा’, भक्तों में शोक की लहर, शव देख नम हुई सबकी आंखें

MP News: मध्य प्रदेश के इस शहर में सड़कों पर अवारा, फटेहाल घूमने के बाद भी लोगों के भीतर जगह बना चुके थे कर्नाटक बाबा। अपनों ने छोड़ा तो परायों ने किया अंतिम संस्कार।

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May 17, 2026
Karnataka Baba dead due to unknown reason (Patrika.com AI Enhanced)

MP News: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में रविवार को दुखद नजारा देखने को मिला। मानसिक रोगी होने के बावजूद लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले 'कर्नाटक बाबा' की मृत्यु ने सभी की आंखे नम कर दी। वो कभी कन्नड़ बोलता, कभी अंग्रेजी में किसी प्रोफेशनल डॉक्टर की तरह पर्चा लिख देता। स्वभाव ऐसा कि मानसिक रोगी लगता ही नहीं था। उसे भले ही अपनों ने दर-दर भटकने छोड़ दिया था, लेकिन परायों से अंतिम विदा में मिले सम्मान को देख लोगों के भी आंसू आ गए।

सड़कों पर अवारा, फटेहाल घूमने के बाद भी लोगों के भीतर जगह बना चुका था। जिसकी झलक रविवार को उस वक्त देखने मिली, जब उसका लावारिस शव चरहाई बाजार के पास मिला और उसे देखने दर्जनों लोग पहुंच गए, जो गमगीन नजर आए। कर्नाटक बाबा के नाम से प्रसिद्ध इस मानसिक रोगी व्यक्ति की मौत पर लोगों के चेहरों पर आंसू देखने मिले।

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लोगों ने ली लावारिस के शव की सुपुर्दगी

पुलिस ने जैसे ही शव का पोस्टमॉर्टम कराकर दफनाने की बात कही, तब उसे जानने वाले लोग सामने आ गए। उन्होंने शव की अंतिम क्रिया पूरे रिवाज से करने की बात कही। इसके बाद कर्नाटक बाबा के शव की हरि बाबा ने सुपुर्दगी ली। बाद में अस्तपाल चौराहा के दुकानदार सुमित चौरसिया, बंटी ठाकुर और अन्य बिट्टू वंशकार आदि ने मिलकर मृतक के शव की अर्थी सजाई और बाजे के साथ अर्थी हटा नाका मुक्तिधाम ले गए, जहां कर्नाटक बाबा के शव को मुखाग्नि दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान भी लोग गमगीन नजर आए।

लोगों के दिलों में बना ली थी जगह

हरि बाबा ने बताया कि काफी समय से उसे जानते हैं, वह 4-5 साल से कीर्ति स्तंभ, अस्पताल चौराहा, चरहाई क्षेत्र में ही घूमता रहता था। पेशे से वह कोई बड़ा डॉक्टर लगता था। अंग्रेजी में फर्राटा बात करता था। कागज में डॉक्टर की तरह ही अंग्रेजी लिखता था। बस यह नहीं बता पाता था कि वह कहां से है। वह उसे अमूनन खाना खिलाते रहते हैं, लेकिन एक दिन से वह नहीं मिला था। होटल संचालक सुमित चौरसिया ने बताया कि वह दुकान के आसपास आता रहता था। कभी भी उसे अन्य मानसिक रोगी की तरह नहीं भगाया। वह भी किसी को परेशान नहीं करता था। वह अलग ही था। भले ही उसे अपनों ने ठुकरा दिया था, लेकिन वह हम सब के दिल में जगह बना चुका था। मेडिकल संचालक बंटी ठाकुर ने बताया कि सुबह जैसे ही सूचना मिली कि कर्नाटक बाबा का शव मिला है, सुनकर काफी बुरा लगा। वह हर दवा को जानता था, डॉक्टर की तरह ट्रीट करता था।

मौत का कारण अज्ञात

बता दें कि रविवार की सुबह पुलिस को सूचना मिली थी कि उपभोक्ता भंडार के पास किसी अज्ञात व्यक्ति का शव पड़ा हुआ है, जिस पर मौके पर पुलिस पहुंची थी। पुलिस को स्थानीय लोगों ने बताया कि यह कर्नाटक बाबा है, जो कि लंबे समय से आसपास घूमता रहता था। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। साथ ही विवेचना में लिया है। मौत का कारण फिलहाल अज्ञात है।

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Published on:
17 May 2026 06:48 pm
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