MP News: जिले की 15 गैस एजेंसियों में मिलीं गड़बड़ियां, 2138 गैस सिलेंडरों का मिला अंतर, उज्जवला योजना के 22 कार्ड जब्त।
MP News: मध्यप्रदेश के दमोह जिले में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर बुधवार को पहली बार जिले की 20 गैस एजेंसियों पर एक साथ छापेमारी की गई। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि उपभोक्ताओं से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर समय पर नहीं दिए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं से अधिक राशि वसूली जा रही है। इसी कारण रात में रणनीति तैयार कर बुधवार सुबह 10 बजे जिले की सभी 20 एजेंसियों पर एक साथ कार्रवाई शुरू कराई गई। इसके लिए 21 जांच दल गठित किए गए थे। उज्ज्वला योजना के कार्डों के दुरुपयोग की शिकायतों को देखते हुए अलग से एक विशेष जांच दल भी लगाया गया था। कलेक्टर ने बताया कि जिन एजेंसियों में गड़बड़ी मिली है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में 15 गैस एजेंसियों में अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान कुल 2138 सिलेंडरों का अंतर पाया गया। स्टॉक रजिस्टर में दर्ज सिलेंडरों की संख्या और मौके पर उपलब्ध सिलेंडरों की संख्या में अंतर मिला। कुछ एजेंसियों में सिलेंडर कम पाए गए, जबकि कुछ स्थानों पर वास्तविक संख्या अधिक दर्ज मिली।
तेंदूखेड़ा के 27 मील स्थित महावीर हार्डवेयर ट्रेडर्स पर कार्रवाई के दौरान 23 कार्ड जब्त किए गए, जिनमें 22 उज्ज्वला योजना के कार्ड और एक सामान्य गैस कनेक्शन कार्ड शामिल है। कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि उज्ज्वला योजना के कार्ड संबंधित हितग्राहियों के पास होने चाहिए थे, लेकिन वे अन्य व्यक्ति के कब्जे में पाए गए। आशंका जताई जा रही है कि इन कार्डों का दुरुपयोग कर महंगे दामों पर सिलेंडर बेचने का प्रयास किया जा रहा था।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट किया कि जिन एजेंसियों में सिलेंडरों का अंतर और अन्य अनियमितताएं मिली हैं, उनके खिलाफ द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस प्रदाय आदेश 2000 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, अधिक कीमत वसूली या नियम विरुद्ध सिलेंडर वितरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में पहली बार एक ही समय पर सभी एजेंसियों की जांच होने से वास्तविक स्थिति सामने आई है। यदि अलग-अलग कार्रवाई की जाती तो अन्य एजेंसियां अपनी व्यवस्था सुधार लेतीं और वास्तविक अनियमितताएं सामने नहीं आ पातीं। विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद गंभीर मामलों में और कठोर कार्रवाई की जाएगी।