दमोह

एमपी में गौवंश की बदहाली…इधर-उधर बिखरे पड़े गाय कंकाल, स्वास्थ्य विभाग टीम के उड़े होश

MP news: एमपी के दमोह जिले के बालाकोट की सरकारी गोशाला में गोवंश की बदहाली, इधर-उधऱ पड़े दिखे कंकाल, मौके पर पहुंची पशु विभाग की टीम...
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Jan 22, 2026
MP news
गौशाला पलते गोवंश(patrika file photo)

MP News: दमोह जिले के नरसिंहगढ़ के बाद अब बालाकोट की सरकारी गोशाला में गोवंश की बदहाली सामने आने से सवाल खड़े हो गए हैं। दमोह ब्लॉक के बालाकोट में स्थित गोशाला में मवेशियों की मौत और इधर उधर पड़े कंकालों की घटना सामने आई है, जिसके बाद हड़कंप मच गया।

इधर मामला तूल पकड़ा तो कलेक्टर के निर्देश पर पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान सामने आया कि टीम के पहुंचने से पहले कुछ मृत मवेशियों के शव हटाए जा चुके थे। मौके पर केवल एक मृत गोवंश मिला। जिसका पंचनामा तैयार किया गया।

जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर को सौंपी

बताया गया है कि जल्दबाजी में जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को सौंप दी गई है। पशु चिकित्सा उप संचालक डॉ. बीके असाटी ने बताया कि गौशाला का संचालन आजीविका मिशन के अंतर्गत अवंति बाई महिला स्वसहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। जांच में गंभीर लापरवाहियां उजागर हुईं। गोशाला में मवेशियों के लिए भूसा उपलब्ध नहीं था, परिसर में भारी गंदगी थी और पीने के लिए गंदा पानी रखा गया था।

100 मवेशियों की क्षमता वाली गोशाला में थे 200 मवेशी

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 100 पशुओं की क्षमता वाली गौशाला में लगभग 200 मवेशी रखे थे। जबकि कागजों में संख्या 450 तक दर्शाई जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक यह सब अधिक अनुदान प्राप्त करने के लिए आंकड़ों में हेराफेरी के लिए किया गया। मवेशी अत्यधिक कमजोर हालत में पाए गए।

एक्शन के लिए प्रशासन की नजरें टेढ़ी, किस पर गिरेगी गाज?

अब प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं, मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि भूख से मवेशियों की मौत हुई और शवों को ट्रॉलियों में भरकर सुनसान इलाके में फेंक दिया। जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो स्थिति देखकर स्वयं हैरान रह गए। इधर, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गोशाला की यह स्थिति नियमित मॉनीटिरिंग नहीं होने की वजह से बनी है।

बड़े सवाल, कौन देगा इनके जवाब

मामले में कई गंभीर सवाल लोगों की जुबान पर हैं। खासतौर से बालाकोट गोशाला में क्षमता से अधिक गोवंश क्यों रखे गए। जब अनुदान बाकायदा मिल रहा तो चारा और साफ पानी की व्यवस्था आखिर क्यों नदारद रही। कागजों में गोवंश की संख्या बढ़ाकर अनुदान लेने का खेल किसके इशारे पर चला। नियमित मॉनिटरिंग क्यों नहीं हुई। जिम्मेदारों पर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इन तमाम सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं।

डॉ. वीरेंद्र असाटी से पत्रिका की सीधी बात

Q. इस घटना के लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं?

A. यह, जो घटना हुई, इसके लिए समूह संचालक और उनके साथ सदस्य ही जिम्मेदार हैं।

Q. मौका निरीक्षण में क्या तथ्य सामने आए?

A. मौके पर देखा गया कि सैकड़ों मवेशियों को जबरन रखा गया था, जबकि उतनी क्षमता गोशाला की नहीं है। यहां भूसा तक का प्रबंध नहीं था। ऐसे में मवेशियों की भूख से मौत होना स्वाभाविक है।

Q. आगे क्या कार्रवाई होगी?

A. मैंने रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की है, जिस पर गोशाला का संचालन जिस समूह द्वारा किया जाता है, उसे हटाया जाएगा। इसके आगे की कार्रवाई दमोह जनपद सीईओ के जरिए होगी।

Published on:
22 Jan 2026 10:01 am