दमोह. चायनीज मांझा, जिसके विक्रय, भंडारण और इस्तेमाल तक पर रोक है, लेकिन यह मांझा जिला मुख्यालय के गली, मोहल्ले और दुकानों पर खुलेआम बेचा जा रहा है। जब शहर के अलावा ब्लॉक और ग्रामीण अंचल में भी यह बेचा जाता है। संक्रांति से ही पतंगबाजी शुरू हो जाती है, ऐसे में इसकी डिमांड बहुत […]
दमोह. चायनीज मांझा, जिसके विक्रय, भंडारण और इस्तेमाल तक पर रोक है, लेकिन यह मांझा जिला मुख्यालय के गली, मोहल्ले और दुकानों पर खुलेआम बेचा जा रहा है। जब शहर के अलावा ब्लॉक और ग्रामीण अंचल में भी यह बेचा जाता है। संक्रांति से ही पतंगबाजी शुरू हो जाती है, ऐसे में इसकी डिमांड बहुत होती है।
शहर के अलग-अलग वार्डों के अलावा बाजार में भी इस प्रतिबंधित मांझे का विक्रय हो रहा है। यही वजह है कि खुले आम पतंगों की दुकानों पर मांझा देखा जा सकता है। दुकानदार अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में इस प्रतिबंधित और पशु-पक्षी और मानव जीवन की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाले मांझे को बेच रहे हैं। एक दुकानदार ने बताया कि इसी मांझे को लोग पसंद करते हैं, इसलिए बेच रहे हैं।
-मुनाफा इसलिए चायनीज मांझे का विक्रय
देशी और चाइनीज मांझा की कीमतें मांझा की गुणवत्ता, मांझा की लंबाई या वजन और बाजार की मांग तय रहती है। यही वजह है कि देशी मांझा ८०० से लेकर १२०० रुपए किलोग्राम में मिलता है। जबकि चायनीज मांझा ४०० रुपए से ८०० रुपए किलोग्राम कीमत है। इसी कीमत में अंतर होने की वजह से दुकानदार इसी को बेचते हैं। यह देशी से मजबूत होता है। इसके बाद दुकानदार ग्राहकों को ४० से ५० फीसदी अधिक कीमत पर मांझा खपाते हैं।
चाइनीज मांझा का विक्रय शहर में हो रहा है तो पता करवाता हूं।
आनंद राज, टी आई कोतवाली