झमाझम बारिश में ही बन सकते हैं बाढ़ के हालात
यूसुफ पठान मडिय़ादो. लगभग 14 साल पहले सुनार नदी से आई तबाही का मंजर भूल चुके हजारों परिवार फिर सुनार नदी के दोनों किनारें के समीप गांवों में रह रहे हैं। यह लोग हमेशा बारिश के मौसम में असुरक्षित होते हंै। इसके बावजूद यह अपने गृह ग्राम को छोड़ कर कहीं अन्य स्थानों पर जाकर रहने को तैयार नहीं है।
बाढ़ के बन सकते हैं हालात
इस वर्ष पंचम नहर परियोजना के बांध से छोड़े गए पानी से सुनार नदी अभी पूरी तरह से भरी हुई। जबकि यह नदी गर्मियों में पूरी तरह से सूख जाती थी, कहीं-कहीं कुंडों में जरूर पानी शेष रहता था। मानसून आने के बाद बारिश के पानी से धीरे-धीरे नदी का जलस्तर बढ़ता था। इसके बाद नदी में जितना पानी अभी है, उतना आता था। लगातार बारिश होने के बाद नदी उफान पर आती थी, फिर बाढ़ के हालात बनते थे, लेकिन इस बार जानकार बताते है कि नदी पूरी तरह भरी हुई है। अगर मानसून के बाद तेज बारिश होती है तो पहले से भरी हुई नदी में बाढ़ के हालात खतरनाक हो सकते हंै।
यहां रहता है खतरा
बारिश के मौसम में हटा, हारट, रोनसरा,पाड़ाझिर, पांजी, धूमा, हिम्मत पटी, देवलाई, कांटी, ढांडी, चंदेना, मुहरई, नरगी, मुराछ, भटदेवा, दिगी गांवों में बाढ़ की आशंका बनी रहती है। वर्ष 2005 में तहसील के यह गांव प्रभावित यह हुई थी।
क्या कहते है ग्रामीण
कपूर सिंह वर्ष 2005 की तबाही का मंजर आज भी याद है, बाढ़ ने पूरी तरह गांव के घेर लिया था। जैसे-तैसे गांव के लोग गांव खाली कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सके थे। लेकिन बाढ़ उतरने के साथ ग्रामीण भी वापस आकर अपने-अपने गांवों में रहने लगे, क्योंकि पुरखों की जमीन जायदाद छोड़ कर फिर क्या करेंगे। बहोरन सिंह का कहना है। बाढ़ से बेहद खराब हालात देख चुके हंै। ढाड़ी गांव में बाढ़ ने खतरनाक हालात पैदा कर दिया है। खेतों में कटाव हो गए थे, रेत के पहाड़ खेतों में तैयार थे। लोग जान बचाकर सुरक्षित स्थानों पर भागने मजबूर थे। इस बार नदी गर्मियों में भरी हुई है। जब भी बारिश का पानी नदी में एकत्रित होगा हालात खराब हो सकते हैं। प्रशासन को नदी किनारे रहवासियों को अलर्ट करने की जरूरत है, ताकि बारिश में अनहोनी को रोका जा सके।