तालाबों की तरह हरा, पीला नजर आने लगा पानी, शहर की गंदगी हो रही नदी में समाहित
दमोह. सुनार नदी बीते ६ साल पहले जनवरी-फरवरी माह में ही अपना अस्तित्व खो देती थी, लेकिन सरसुमा पावर प्लांट पर डेम बनने से अब नदी में पर्याप्त पानी बना रहता है। इसके बाद भी नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। इसका मुख्य कारण है शहर से निकलने वाले गंदा नाला है, जो नावघाट पर नदी के पानी में मिलने से नदी का पानी प्रदूषित करता है। जिससे नदी के घाटों पर गंदगी जमा होती जा रही है।
नदी का पानी का रंग बदलकर हरा, पीला होता जा रहा है। पानी की सतह पर हरी चादर चढ़ती जा रही है जिससे नगरवासी नदी में नहाने का आनंद नहीं ले पा रहे हैं। प्रदूषण के कारण नदी के पानी का उपयोग मुंह धोने में भी नहीं हो पा रहा है। इसके गंदे पानी को नदी में मिलने से रोकने के लिए वर्षों पूर्व नाले पर तीन फिल्टर प्लांट बनाए गए थे, लेकिन निर्माण के समय ही इनकी गुणवत्ता में गड़बड़ी से पानी फिल्टर होकर नदी में नहीं पहुंच सका। पिछले वर्षों में सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जगह-जगह बोरी बंधान कार्य कर गंदे पानी रोकने का काम किया जाता था, लेकिन इस बार कोई भी संस्था इस कार्य के लिए आगे नहीं आई। न ही नवनिर्वाचित परिषद ने इस ओर ध्यान दिया। पिछले कुछ दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश से शहर की गंदगी नदी में पहुंच रही है।
पूर्व के वर्षों में ग्रीष्म काल मे सुनार नदी के जो घाट भीड़ से गुलजार रहते थे अब सुबह से ही सूने दिखाई देते हैं। पूर्व के वर्षों में नदी में नहाने के लिए सुबह से बच्चे, महिलाएं, बूढ़ों की भीड़ रहती थी। नगर वासियों के रिश्तेदार तैराकी सीखने आते थे, लेकिन अब ऐसे नजारे देखने को नहीं मिल रहे हैं। बता दें कि पूर्व के वर्षों में नगर के युवा बीच नदी में एक चट्टान को राजपाठ मानकर खेला करते थे और अन्य चट्टानों पर भी अठखेलियां करते रहते थे। विडंबना यह है कि नदी में पर्याप्त पानी होने के बाद भी नदी के सभी घाट सूने रहते हैं। जनपेक्षा है कि जनप्रतिनिधि जीवनदायीनि सुनार को प्रदूषण से स्थाई मुक्ति दिलाने प्रयास करें, जिससे नदी के पानी का रोजमर्रा में उपयोग किया जा सके।