दंतेवाड़ा

दंतेवाड़ा बना छत्तीसगढ़ का टूरिज्म ब्रांड! पर्यटन का नया चेहरा, जानें बस्तर की धरती पर बदलाव की कहानी…

Bastar News: कभी घने जंगलों, जनजातीय संस्कृति और संघर्ष की पहचान रहा दंतेवाड़ा अब छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर सबसे बड़े आकर्षण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

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दंतेवाड़ा बना छत्तीसगढ़ का टूरिज्म ब्रांड(photo-AI)

Bastar News: कभी घने जंगलों, जनजातीय संस्कृति और संघर्ष की पहचान रहा दंतेवाड़ा अब छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर सबसे बड़े आकर्षण केंद्र के रूप में उभर रहा है। बारसूर और मुचनार जैसे ऐतिहासिक क्षेत्रों में रोमांच, प्रकृति और आध्यात्मिकता का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है, जो बस्तर को नई पहचान दे रहा है। ‘अतुल्य दंतेवाड़ा’ अभियान के तहत यह इलाका छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत को आधुनिक पर्यटन से जोड़ने का जीवंत उदाहरण बन गया है।

Bastar News: बारसूर: जब बस्तर था दक्षिण कोसल का सांस्कृतिक केंद्र

इतिहासकारों के अनुसार बारसूर 10वीं–11वीं शताब्दी में दक्षिण कोसल क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र था। यहां स्थापित सैकड़ों मंदिरों के अवशेष बताते हैं कि यह क्षेत्र कभी ‘मंदिरों का नगर’ कहलाता था। नागर शैली में निर्मित शिव, विष्णु और गणेश मंदिर बस्तर की प्राचीन स्थापत्य कला और आध्यात्मिक परंपरा की गवाही देते हैं। आज वही बारसूर इतिहास की धरोहर के साथ आधुनिक पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

जिपलाइन और नाइट कैंपिंग: जंगल में रोमांच का नया अध्याय

बारसूर–मुचनार क्षेत्र में जिले की सबसे लंबी जिपलाइन पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन चुकी है। ऊंचाई से जंगल और घाटियों के बीच फिसलते हुए पर्यटक बस्तर की हरियाली को नए नजरिए से देख रहे हैं। वहीं नाइट कैंपिंग ने जंगल के अनुभव को और खास बना दिया है। तारों से सजी रात, ठंडी हवाएं और प्रकृति की आवाजें—यह सब मिलकर पर्यटकों को शहरी जीवन से अलग एक आत्मिक शांति का अनुभव कराते हैं।

सातधार नदी: प्रकृति और साधना का संगम

सातधार नदी का कल-कल बहता जल बस्तर की आत्मा को दर्शाता है। नदी के किनारे फैली हरियाली, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को ध्यान, फोटोग्राफी और पिकनिक के लिए आकर्षित कर रहा है। मान्यता है कि प्राचीन काल में साधु-संत यहां तपस्या किया करते थे। आज यह स्थान शांति की तलाश में आने वाले सैलानियों के लिए एक प्राकृतिक आश्रम बन चुका है।

रामायण से जुड़ा बस्तर, आस्था की गहरी जड़ें

छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है और बस्तर क्षेत्र रामायण काल से जुड़ा रहा है। मान्यता है कि वनवास के दौरान प्रभु राम ने दंडकारण्य क्षेत्र में लंबा समय बिताया था। दंतेवाड़ा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इसी आस्था से जुड़ा है, जो आज पर्यटन के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है।

‘अतुल्य दंतेवाड़ा’: पर्यटन से बदलती तस्वीर

दंतेवाड़ा जिला प्रशासन सड़क, पार्किंग, शौचालय, होमस्टे और सुरक्षा सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। स्थानीय युवाओं को गाइड, कैंप ऑपरेटर और पर्यटन सेवाओं से जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त निगरानी से पर्यटक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

भविष्य की राह: बस्तर से ब्रांड छत्तीसगढ़ तक

आने वाले समय में ट्रेकिंग, बोटिंग और सांस्कृतिक टूर जैसे नए विकल्प जोड़े जाएंगे। बारसूर–मुचनार अब केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास, प्रकृति और संस्कृति को जोड़ने वाली जीवंत कहानी बन रहा है। दंतेवाड़ा यह साबित कर रहा है कि बस्तर केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन भविष्य का मजबूत आधार है।

Updated on:
15 Jan 2026 12:40 pm
Published on:
15 Jan 2026 12:37 pm
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