दंतेवाड़ा

बेटियों का दर्द सुन रो पड़ेंगे आप, बोली – पिता नहीं आएंगे वापस, अनाथ हो गए हम…

पिता की मौत पर फफक.फफक कर रो रही बेटियां, बोली न पुलिस के मुखबिर थे न माओवाद के पक्ष धर। बेटियों के क्रंदन पर दिलासा दे रहा था पूरा गांव।
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Updated: 2 Apr 2018, 10:14 PM IST
पिता की हत्या कर बेटियों को कर दिया अनाथ, रोते-रोते मां की भी सूख चुकी है आंसू
पिता की हत्या कर बेटियों को कर दिया अनाथ, रोते-रोते मां की भी सूख चुकी है आंसू

बेटियां बोली - आरोपी पकड़े भी जाएंगे तो पिता वापस नहीं आएंगे, अनाथ कर दिया हमें...

पिता की हत्या कर बेटियों को कर दिया अनाथ, रोते-रोते मां की भी सूख चुकी है आंसू

दंतेवाड़ा। माओवादियों ने पुलिस मुखबिरी के शक में भीमा मरकाम को मौत के घाट तो उतार दिया। लेकिन परिवार में तीन दिन बाद भी चीख-चीत्कार बंद नहीं हुई। भीमा की तीन बेटियां सुचिता, नीलू और लक्ष्मी हैं। सुचिता बीए में पढ़ रही है, नीलू आस्था विद्यामंदिर जावंगा में और कुआकोंडा आश्रम में रह कर लक्ष्मी 12 वीं में है। पिता का साया उठ चुका है। माहाराकरका में पत्रिका टीम पहुंची तो महिलाओं का घर में जमावड़ा था। महिलाएं बेटियों को दिलासा दे रही थी। लेकिन कोई मरहम काम ? नहीं कर रहा था। एक ही बात बोल रही थी पिता को मार दिया और उनको अनाथ कर दिया। भाई है नहीं अब उनकी देख रेख कौन करेगाघ् फिर फफक कर रोने लगी।

न पुलिस मुखबिर थे न ही नक्सलियों के हिमायती
पत्रिका टीम ने भी दिलाशा दीए तो पढऩे वाली छात्राओं ने कहा कि पिता की मौत के बाद पुलिस भले ही आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दे। अब पिता लौट कर तो नहीं आएगें। चीख कर बोली वे न पुलिस के मुखबिर थे और न माओवादियों के हिमायती। अपनी बेटियों को पढ़ाना. लिखाना चाहते थे। यही उनका लक्ष्य था। तीनों बेटियों को पढ़ाने के लिए दिन रात मेहनत कर पैसा एकत्र करते थे। कहते थे बेटा तो है नहीं बेटियां ही सब कुछ है। बीमार होते दुख न होताए उनको तो मार दिया। मेरे पिता की इतनी दर्दनाक मौतण्ण् तीनों फिर से फफक.फफक कर रोने लगी।

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