
जज्बे को सलाम ! जहां डर से कांप जाती है रूह, वहां ये लेडी इंजीनियर दे रही पुरुषों को टक्कर
दंतेवाड़ा . धुर माओवादी इलाके जहां जाने में अच्छे-अच्छों की दहशत में रूह कांप जाती है, वहां एक महिला इंजीनियर सरकारी इमारतों के वायरिंग का काम कर रही है। जिला पंचायत में पदस्थ जया धु्रवे, पेशे से इलेक्ट्रिकल्स इंजीनियर है। माओवादी क्षेत्र में बनने वाली आंगनबाड़ी, स्कूल व सरकारी इमारतों में इलेक्ट्रिकल्स की जिम्मेदारी इन पर ही है। बस्तर, जहां माओवादी सरकारी इमारतों के बनने का विरोध करते हैं वहां वे चुनौतीपूर्ण तरीके से अपने काम को अंजाम दे रही है।
पिता से प्रेरित होकर चुना यह फील्ड
मूलत: बचेली की रहने वाली जया बताती है, बस्तर के अंदरूनी इलाकों में काम करना वाकई बड़ी चुनौती है। भाषाई समस्या तो है ही, यहां आए दिन का माओवादी वारदात की खबरें आती रहती है। इस फील्ड को पिता से प्रेरित हो कर चुना। पिता लाल सिंह ध्रुवे एनएमडीसी में पदस्थ थे। वह भी इलेक्टिीकल्स से इंजीनियर थे। उनको जब पेचकस, प्लास लेकर घर की बिजली व पंखे सुधारते देखती तो इंजीनियर बनने की प्रेरणा मिलती थी। आदिवासी परिवार से होने से पढ़ाई लिखाई आगे बढ़ रही थी पर मन से इंजीनियर बनने का सपना धूमिल हो रहा था।