दंतेवाड़ा

इस हाइवे में 18 किमी का सफर होता है डरावना, पत्ते के हिलने से भी कांप जाती है रूह

माओवदी टापू कहा जाने वाला जगरगुंडा तक आखिरकार पहुंच ही गई सरकार, दहशतजदा तस्वीरें दिखती है रास्ते में, अब विकास की दरकार।
2 min read
• •
Updated: 6 Mar 2018, 10:21 PM IST
इस हाइवे में 18 किमी का सफर होता है बेहद डरावना, पत्ते के हिलने से भी कांप जाती है रूह
इस हाइवे में 18 किमी का सफर होता है बेहद डरावना, पत्ते के हिलने से भी कांप जाती है रूह

दंतेवाड़ा. अरनपुर-जगरगुंडा सड़क निर्माण चार सालों से चल रहा है। अभी भी कुछ काम बचा ही है। लेकिन अब इस रास्ते से जगरगुंडा लोग दहशत के बीच जाने लगे हैं। इस 18 किलोमीटर के सफर को तय करने के दौरान दहशतजदा तस्वीरें दिखाई देती है। जगुरगुंडा बाजार गुलजार होगा और राहत शिविर तक आसानी से राशन पहुंचाया जा सकता है। जगरगुंडा में वो रौनक नहीं दिखी न ही कोई सामने आने के लिए तैयार हुआ। इस बीच कुछ ग्रामीणों से बात करने का प्रयास किया, लेकिन वे सामने आने के लिए कतराते रहे। उनकी दबी जुबां इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि माओवादियों के इस टापू तक सरकार पहुंच गई है। अब विकास की बयार बहे तो लोगों का जीवन आसान होगा। यहां लोग अभी भी दहशत में है।

शहीद के नाम से कमलपोस्ट
सड़क जोड़ानाला पार कर चुकी है। आगे सड़क में डामरीकरण का काम बचा है। लेकिन वाहनों का आवाजाही देखी जा रही है। इस सड़क का निर्माण करवाने में जवानों ने पसीना नहीं खून बहया है। 18 किलोमीटर की सड़क में एक दर्जन से अधिक विस्फोट हुए है। जितने बार विस्फोट हुआ है उतने ही जवान घायल हुए है। एक जवान बम की जद में आ कर घायल भी हुआ है। इस जवान का नाम कमल था। पुलिस अधिकारियों ने जवान के नाम से कमलपोस्ट कैंप का नाम दिया। यहां सीआरपीएफ रह ाही है।

ध्वस्त है इमारतें, रास्ते में खड़ी है जली बस
इस सड़क से गुजरने के दौरान डर जरूर लगेगा। कोंडासावली को पार करने के दौरान एक बस जली हुई खड़ी है। माओवादियों ने सलवाजुडूम के दौरान जलाई थी। कई सरकारी इमारतें ध्वस्त है। ये इमारतें माओवादी कारनामों की गवाह है। लोगों का कहना है कि अभी उस तरह से वाहन नही दौड़ रहे हैंए जैसे 2005.06 के पहले दौड़ते थे। सरपट वाहन विकास के साथ ही दौड़ लगाएगें।

निर्माण की एक झलकियां
* 27 करोड़ की लगात से तैयार हो रही यह सड़क।
* निर्माण के दौरान 150 से भी अधिक बम निकले।
* एक दर्जन से ज्यादा विस्फोट हुए, एक दर्जन जवान घायल हुए।
* एक जवान कमल नाम का शहीद हुआ, इसके नाम पर कमलपोस्ट है।
* अरनुपर से जगरगुंडा तक तीन से चार किलोमीटर के बीच कैंप स्थापित।

ये है अधिकारी का कहना
कोंडासावली के आगे तक डामरीकरण हो चुका है। थोड़ा समय इस सड़क को बनने में और लगेगा। अब इस सड़क से जगरगुंडा पहुंचा जा सकता है। लोग जाने भी लगे हैं।
पीडब्लूडी ईई, जोसेफ थॉमस

Published on: