
दंतेवाड़ा. बीजपुर और तेलांगना बॉर्डर पर माओवाद के खिलाफ मिली बड़ी सफलता के बाद आंतरिक सुरक्षा सलाहकार के विजय कुमार दक्षिण बस्तर के प्रवास पर है। वह दो दिन तक इस क्षेत्र में रहेगें। सूत्रों का कहना है इस बीच बेहद गोपनीय बैठक भी है। संभाग के सभी एसपी से उनकी मुलाकात होनी है। उनसे माओवाद पर नकेल कसने और भी बड़े कदम उठाए जाने पर चर्चा की जानी है। मंगलवार को वे बारसूर हेलिकॉपटर से पहुंचे। यहां उनका रात्रि विश्राम होगा और अधिकारियों से चर्चा होगी। बताया जा रहा है यहां से वह बुधवार को अरनपुर जाएगें। मओवाद के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में किस तरह से काम करना है और क्या प्लनिंग अधिकारियों ने बनाई है, इस पर मंथन होगा। माओवादी मोर्चे पर सफलता और विफलता पर चर्चा की भी बात होनी है।
टीसीओसी फेल करने रणनीति पर देना है जोर
तुलार में प्रवक्ता के करीब पहुंच कर फेल हुए। इस तरह के ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए और क्या हो सकता है। अधिकारिक सूत्रों की बात मानें तो आंतिरकि सुरक्षा सलाहकार का दौरा माओवादियों के टीसीओसी को पूरी तरह से फेल करने के रणनीति पर जोर देना है। फरवरी से माई माह में ही माओवादी जवानों को नुकसान अधिक पहुंचाते है। माओवादियों की इस टेक्टिस पर प्लान तैयार किया गया है। बीजापुर और तेलांगना की तरह माओवादियों को बैकफुट पर लाना होगा। अन्य राज्यों में माओवाद कमजोर पड़ा है। बस्तर में दक्षिण बस्तर ही ठोस जमीन है। इस जमीन को भी समाप्त करने के लिए समन्वय के साथ काम करना होगा।
बारसूर पल्ली रोड का करेगें अवलोकन
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आंतरिक सुरक्षा सलाहकार का दौरा जवानों का हौंसला बढ़ाएगा। इस दौरान वे उन सड़कों का भी अवलोकन करेगें, जिन्हें जवान अपनी जान जोखिम में डाल कर बना रहे हैं। वह बारसूर-पल्ली रोड का अवलोकन करेगें। यह सड़क 2005.06 के बाद से बंद है। इस सड़क पर निर्माण कार्य जवानों के साए में चल रहा है। यह राज्य मार्ग है। इस सड़क को बहाल कराने के लिए सरकार सालों से प्रयास कर रही है। इस सड़क के अवलोकन के बाद अरनुपर जाएगें। अरनपुर.जगर गुंडा सड़क निर्माण पिछले चार सालों से चल रहा है। इस सड़क का निर्माण अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है।
अबुझमाड़ का दक्षिणी द्वार और उप राजधानी पर अधिकारियों की नजर
माओवादियों की उपराजधानी कहा जाने वाले अरनपुर.जगरगुंडा में विकास का रास्ता अधिकारी तय मान रहे हैं। यहां आधा दर्जन से अधिक कैंप स्थापित हो चुके हैं। ग्रामीण फोर्स पर भरोसा भी कर रहे हैं। इस उपराजधानी में सेंध करने के बाद पुलिस अधिकारियों की नजर बारसूर इलाके के माओवादी गढ़ पर है। फोर्स तुलार गुफा तक पहुंच कर माओवादियों से मुठभेड़ कर धूल चटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों इलाकों मे जैसे ही फोर्स ही गतिविधि तेज होगीए माओवादियों को छुपने की जगह नहीं बचेगी। बारसूर को अबूझमाड़ का दक्षिणी द्वार कहा जाता है। माओवादियों का सुरक्षित पनाह गाह भी यही इलाका है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इन्ही सभी इलाकों के लिए प्लनिंग तैयार होनी है। आंतरिक सुरक्षा सलाहकार माओवादियों की टीसीओसी के दौरान दौरा बड़ा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।