दंतेवाड़ा

Breaking : मंत्री करते रहे लोकार्पण, उधर एंबुलेंस के अभाव में दर्द से तड़पता रहा मासूम

दो मंत्रियों की तीमारदरी में लग गई एंबुलेंस, दो घ्ंटे बाद मिली एंबुलेंस, वाट्सअप ग्रुप में प्रधानमंत्री के नाम बच्चे के दर्द का शिकायती पत्र।
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Updated: 1 Sep 2017, 10:17 PM IST
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रात भर गीदम सामुदायिक हॉस्पिटल में समुचित उपचार न मिलने के करण तड़पता रहा

दंतेवाड़ा. गीदम ब्लॉक के पनेड़ा पंचायत में निर्माणाधीन मकान के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मासूम गुरुवार को झुलस गया। उसे परिजनों ने आनन-फानन में भर्ती कराया। रात भर गीदम सामुदायिक हॉस्पिटल में समुचित उपचार न मिलने के करण तड़पता रहा। मासूम को जिला हॉस्पिटल लाए तो यहां बर्न यूनिट के अभाव में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद रिफर कर दिया। एंबुलेंस न मिलने का वजह से दो घंटे और दर्द से कराहता रहा। इसके पीछे का कारण बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल की दो एंबुलेंस मंत्रियों के कार्यक्रम में लगी हुई थी।

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मंत्री लगे रहे इमारतों का लोकार्पण करने
मंत्री केदार कश्यप और वन मंत्री महेश गागड़ा को दंतेवाड़ा में कई इमारतों का लोकार्पण करना था। एक था कॉफी हाउस और दूसरा पूरानी इमारत को पहनाई गई नई चादर लक्ष्य प्रति स्पर्धा है। इन दोनों मंत्रियों के काफिले के पीछे एंबुलेंस को लगाया गया था। जब एंबुलेंस नही मिली तो कटेकल्याण से108 को बुलाया गया। इस दर्द भरी कहानी का प्रधान मंत्री के नाम लेटर वायरल हो रहा है। दोपहर बाद सोशल मीडिया में वायरल हुआ। इस पत्र में लिखा है कि मासूम की तड़प को एंबुलेंस की जरूरत थी या मंत्रियों की तिमारदारी के लिए। वायरल पत्र में एंबुलेंस पर खड़े हुए सवाल स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल कर रख दी है।

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डॉक्टरों दे रहे थे आश्वासन
गीदम ब्लॉक के करीबी गांव पनेड़ा में निर्माणाधीन एक भवन के ऊपर खेलते हुए भीमराज (06) पिता बुधरू चला गया। वहां बिल्डिंग के छत के करीब से गुजर रही बिजली तार के चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि 60 फीसदी से अधिक झुलसा है। परिजनों ने उसे गीदम हॉस्पिटल में भर्ती करया। यहां चिकित्सकों ने परिजनों से कहा कि मासूम ठीक हो जाएगा। लेकिन सुबह होते तक उसकी हालत और बिगड़ गई। डॉक्टरों ने जिला अस्पतल रेफर किय।

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बर्न यूनिट भी नहीं है, सर्जन भी छुट्टी पर
जिला अस्पताल में पहुंचने पर डॉक्टरों ने बर्न युनिट का हवाला दिया।उन्होंने कहा कि यहां बर्न यूनिट नहीं है और सर्जन भी छुट्टी पर है। आखिरकार उस बच्चे को प्राथमिक उपचार के बाद रिफर कर दिया। अब बड़ी समस्या उपजी, अस्पताल में एंबुलेंस मौजूद ही नहीं थी। एंबुलेंस के लिए दो घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। कटेकल्याण फोन कर एंबुलेंस को बुलाया गया। वह भी दो घंटे में पहुंच सकी। इसके बाद बच्चे को जगदलपुर रिफर किया गया।

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जिम्मेदार लापरवाह पर होगी कार्रवाई
सीएचएमओ दंतेवाड़ा डॉ. एचएल ठाकुर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के पास एबुलेंस की कमी नहीं है। बच्चे को एबुलेंस लेट क्यों मिली इसको पता करवाता हूं। यदि लापरवाही पाई जाती है तो कार्रवाई होगी।

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