8 thousand people tied up Bandh in Lakkhi Mela जिला प्रशासन ने 3 हजार स्ट्रेचर की व्यवस्था रखी है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस बार अभी तक करीब 8 हजार लोगों को बंध बांधा जा चुका है।
मध्यप्रदेश का यह अजब गजब मेला है। प्रदेश के दतिया के रतनगढ़ माता मंदिर में हर साल भाई दूज के मौके पर तीन दिन का यह मेला लगता है जिसे लक्खी मेला के रूप में जाना जाता है। मेले में लाखों लोग आते हैं। विशेष तौर पर सर्पदंश से पीड़ित या अन्य जहरीले जानवरों के काटने के बाद लोग यहां आते हैं। मान्यता है कि रतनगढ़ वाली माता का बंध बांधते ही जहर उतर जाता है और वे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। इससे पहले मरीजों को सिंध नदी में स्नान करना होता है। खास बात यह है कि सिंध में डुबकी लगाते ही अच्छे भले लोग बेहोश हो जाते हैं। ऐसी हालत में इन्हें मंदिर ले जाने के लिए प्रशासन हजारों स्ट्रेचर की व्यवस्था करता है, कई मरीजों को उनके परिजन कंधों पर उठाकर ले जाते हैं। जिला प्रशासन ने इस बार 3 हजार स्ट्रेचर की व्यवस्था रखी है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस बार अभी तक करीब 8 हजार लोगों को बंध बांधा जा चुका है।
लक्खी मेला में अब तक देशभर के 30 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। सर्पदंश पीड़ितों ने सिंध में डुबकी लगाई और बेहोश होने लगे। ऐसे करीब 8 हजार पीड़ितों को स्ट्रेचर पर मंदिर तक ले जाया गया।
लक्खी मेला रतनगढ़ की पहाड़ी पर लगता है जोकि दतिया से करीब 60 किमी दूर है। रविवार शाम तक मेले में आनेवाले श्रद्धालुओं की संख्या 30 लाख के पार पहुंच चुकी थी। यहां अभी भी भारी भीड़ उमड़ रही है।
सर्पदंश से ग्रसित श्रद्धालु सिंध में नहाते ही बेहोश होने लगते हैं। साथ आए लोग उन्हें स्ट्रेचर या अपने कंधों पर डालकर रतनगढ़वाली माता के मंदिर लेकर जाते हैं। यहां माता और उनके भाई कुंवर महाराज की पूजा करते हैं। मान्यता है कि माता और कुंवर सर्प या अन्य जहरीले जानवर के काटने के बाद किसी की मौत नहीं होने देते, उसे पूरी तरह विषमुक्त कर देते हैं। मंदिर में झाड़ा लगने के बाद बेहोश मरीज चैतन्य हो जाता है।
अधिकारियों के अनुसार इस बार अब तक 8 हजार लोग विषमुक्त हो चुके हैं। जिला प्रशासन ने इस बार 3 हजार स्ट्रेचर की व्यवस्था रखी है लेकिन ये कम पड़ रहे हैं।