
Rajendra Bharti- एमपी में दतिया उपचुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दलों, कांग्रेस और बीजेपी में कवायद तेज हो गई है। शनिवार को प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने दतिया का दौरा कर कार्यकर्ताओं में जोश जगाया। वे कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए। दतिया सीट के लिए कांग्रेस के प्रत्याशी के नाम का ऐलान जल्द किए जाने की बात कही जा रही है। अब सभी की निगाहें पार्टी की टिकट पर टिकी हैं। दतिया सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में राजेंद्र भारती की पत्नी और बेटे के नामों पर विचार चल रहा है। दो अन्य बड़े नेता भी पार्टी से अपने लिए विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं।
दतिया में उपचुनाव की अचानक घोषणा के बाद कांग्रेस में हलचल मची है। पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती की सदस्यता खत्म होने का मामला हाईकोर्ट में होने के चलते कांग्रेस नेता फिलहाल उपचुनाव की उम्मीद नहीं कर रहे थे। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदवार का चयन करना है।
पूर्व विधायक राजेंद्र भारती जहां अपने बेटे को मैदान में उतारने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं वहीं दो नेता और दावेदारी जता रहे हैं। इस बीच प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने 4 जुलाई को दतिया पहुंचकर स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुनाव की रणनीति तैयार की। उन्होंने संभावित उम्मीदवार के लिए कार्यकर्ताओं के मन की भी थाह ली।
कांग्रेस को 8 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट में भारती के केस में सुनवाई को लेकर भी अभी आस है। इस बीच उपचुनाव के लिए उम्मीदवार के नामों पर भी विचार चल रहा है। पार्टी में शीर्ष नेताओं के बीच मतभेद को देखते हुए टिकट को लेकर खींचतान मचना तय माना जा रहा है।
सदस्यता खत्म होने के बाद से ही पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती दतिया सीट के लिए अपने बेटे अनुज को लेकर भोपाल से दिल्ली तक जोर लगा रहे हैं। वहीं 2023 के विस चुनाव में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक भी अपना दावा ठोक रहे हैं। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पहले नायक को ही टिकट दिया था, लेकिन विरोध के बाद भारती को मैदान में उतारा गया। वहीं दतिया से पहले विधायक रह चुके घनश्याम सिंह भी दावेदारों में शामिल हैं। हालांकि निर्णय एआइसीसी लेगी।
इस बात की प्रबल संभावना है कि कांग्रेस, जनता की संवेदना लेने के लिए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के परिवार से किसी को मैदान में उतार सकती है। प्रत्याशी के रूप में उनकी पत्नी और बेटे के नामों पर विचार चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना कि भाजपा यदि नरोत्तम मिश्रा को प्रत्याशी बनाती है या किसी अन्य पर दांव लगाती है तब भी जीत की राह आसान नहीं होगी।