दौसा

64 प्रतिशत पशु चिकित्सालयों को नहीं मिल रहा ‘आसरा ’

- ग्राम पंचायतों ने कर रखी है भवन की अस्थाई व्यवस्था
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Mar 04, 2020
64 प्रतिशत पशु चिकित्सालयों को नहीं मिल रहा ‘आसरा ’
दौसा. पापड़दा स्थित एक दूसरे भवन में चल रहा पशु चिकित्सालय।

- पशु चिकित्सा विभाग का मामला
दौसा. कहने को तो राज्य सरकार मानव व पशुओं की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर चिंतित नजर आती है, लेकिन हकीकत है कि न तो लोगों को उचित इलाज मिल रहा है और ना ही पशुओं को इलाज मिल रहा है। हकीकत यह है कि दौसा जिले में बेजुबान पशुओं के लिए स्वीकृत अस्पतालों में से 64 प्रतिशत में पशु एवं चिकित्सा विभाग का स्वयं का भवन नहीं है। इन अस्पतालों के लिए ग्राम पंचायतों ने वैकल्पिक व्यवस्था कर अपने भवन दे रखे हैं। ऐसे में अच्छे भवन नहीं होने से पशुओं को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। कई जगह तो चिकित्सकों एवं चिकित्साकर्मियों को दवा आदि रखने के लिए जगह ही नहीं है।

इतने अस्पतालों में नहीं है भवन
जिलेभर में 192 पशु चिकित्सालय है। इनमें से 69 अस्पतालों के पास तो पशु चिकित्सा विभाग के भवन है, जबकि 123 अस्पतालों के पास भवन नहीं है। जिले में एक पॉलीक्लीनिक है, जो जिला मुख्यालय पर है। इसके लिए तो करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से भवन बन गया है। जिले में प्रथम श्रेणी के 17 पशु चिकित्सालय है। इनमें से 14 में सरकारी भवन है और 3 को वहां की ग्राम पंचायतों ने दे रखे हैं। इसी प्रकार 42 पशु चिकित्सालय है। इनमें से 26 पशु चिकित्सालयों में तो सरकारी भवन है, लेकिन 16 अस्पतालों के पास स्वयं का भवन नहीं है। जिले में पांच पशु औषधालय है, इनमें से 3 के पास तो सरकारी भवन है, लेकिन 2 पशु चिकित्यालयों को ग्राम पंचायतों ने भवन दे रखे हैं। इसी प्रकर जिले में करीब 127 पशु उप चिकित्सा केन्द्र हैं। इनमें से मात्र 25 में ही सरकारी भवन है। अन्य में विभाग का भवन नहीं है।

अधिकांश जगह नहीं मिल रही है भूमि
जिले में पशु चिकित्सालयों के लिए अधिकांश स्थानों पर विभाग को भूमि नहीं मिल रही है। इससे विभाग भवन नहीं बना पा रहा है। विभागीय अधिकारियों की माने तो विभाग ग्राम पंचायतों से बार-बार पट्टे मांग रहा है, लेकिन अधिकांश ग्राम पंचायतें विभाग को पट्टा नहीं दे रही है। इस कारण ही विभाग के अधिकांश भवन नहीं बन रहे हैं।

चिकित्साकर्मियों को भी होती है असुविधा
पशु चिकित्सालय भवनों के अभाव में न केवल पशुओं के इलाज में ही दिक्कत आती है,बल्कि चिकित्सा स्टाफ को भी खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। यहां पर उनको न बैठने के लिए कोई उचित व्यवस्था है और न ही दवाइयां एवं संसाधन रखने के लिए भी जगह का अभाव है। वहीं पशुपालक जब अपने पशुओं को इलाज के लिए लाते हैं तो उन्हें परेशानी होती है।

फैक्ट फाइल
जिले में पशुचिकित्सालय - 192
सरकारी पशुचिकित्सा भवन - 69
बिना भवन के पशु चिकित्सालय - 127


जमीन मिले तो बनाएं भवन
जिन अस्पतालों के पास विभाग का भवन नहीं है, उन जगह भवन बनाने के लिए ग्राम पंचायतों से भूमि आवंटन का पट्टा मांगा गया है।
- डॉ. निरंजनलाल शर्मा, संयुक्त निदेशक पशु चिकित्सा विभाग दौसा

Published on:
04 Mar 2020 07:15 am