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दौसा में ‘चप्पल’ बनी चुनावी परेशानी, निर्दलीय प्रत्याशियों का फूटा गुस्सा, चुनाव चिन्ह बदलने की उठाई मांग

Election Symbol Controversy: दौसा में निकाय चुनाव के दौरान कई निर्दलीय प्रत्याशियों को ‘चप्पल’ चुनाव चिन्ह मिलने से नाराजगी है। प्रत्याशियों ने इसे बदलने की मांग की है।
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दौसा

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Harshita Saini

Sep 04, 2026

dausa election symbol controversy

Ai Generated Image

दौसा। निकाय चुनाव के बीच दौसा में चुनाव चिन्ह को लेकर अलग ही तरह की नाराजगी देखने को मिल रही है। कई निर्दलीय प्रत्याशियों को ‘चप्पल’ निशान मिला है, लेकिन उम्मीदवार इसे अपने लिए शुभ नहीं मान रहे। उनका कहना है कि चुनाव लड़ते समय प्रत्याशी की कोशिश रहती है कि उसे ऐसा चिन्ह मिले, जिसे वह अपनी पसंद का माने। इसी वजह से अब चप्पल के आवंटन को लेकर विरोध शुरू हो गया है।

चुनाव चिन्ह की सूची बनी नाराजगी की वजह

निर्दलीय प्रत्याशियों के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी चुनाव चिन्हों में अलमारी को पहला और चप्पल को दूसरा स्थान दिया गया है। आवंटन इसी क्रम में होने के कारण दूसरे नंबर वाले उम्मीदवारों के हिस्से में चप्पल आ रही है। प्रत्याशियों का कहना है कि उन्होंने नामांकन के दौरान अपनी पसंद के निशान देने की कोशिश की थी, ऐसे में अब उन्हें मनपसंद चिन्ह के बजाय चप्पल मिलना परेशानी की वजह बन गया है।

प्रत्याशियों ने निशान बदलने की मांग रखी

चप्पल चुनाव चिन्ह मिलने से नाराज उम्मीदवारों का कहना है कि वे इसे शुभ नहीं मानते। उनका सवाल है कि यदि किसी प्रत्याशी ने अपनी पसंद में इस चिन्ह को नहीं चुना है तो उसे आवंटन के दौरान यही निशान क्यों दिया जाए। इसी बात को लेकर निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव चिन्ह बदलने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि चुनाव मैदान में उतरने वाले उम्मीदवार के लिए उसका चुनाव चिन्ह काफी मायने रखता है।

कुछ पसंद के निशान आयोग की सूची में ही नहीं

नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रत्याशियों ने अपनी पसंद के अलग-अलग चुनाव चिन्ह भरने की कोशिश की थी। हालांकि, रिटर्निंग अधिकारी के अनुसार कुछ उम्मीदवारों ने ऐसे निशान भी चुन लिए थे, जो राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी 40 चुनाव चिन्हों में शामिल नहीं हैं। ऐसे विकल्पों के आधार पर चिन्ह देना संभव नहीं है। इसी वजह से आयोग की निर्धारित सूची में शामिल निशानों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

वहीं इस मामले को लेकर रिटर्निंग अधिकारी संजू मीणा ने बताया कि चुनाव चिन्हों का वितरण राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक किया जा रहा है। उनके अनुसार उपलब्ध सूची में चिन्हों का क्रम तय है और उसी आधार पर आवंटन किया जाता है।