दौसा। करीब चार साल पूर्व सामूहिक बलात्कार के बाद विवाहिता की हत्या करने के बहुचर्चित मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश रितु चौधरी ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने टिप्पणी भी की, ‘आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होंगी? गुरुवार को दोनों को […]
दौसा। करीब चार साल पूर्व सामूहिक बलात्कार के बाद विवाहिता की हत्या करने के बहुचर्चित मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश रितु चौधरी ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने टिप्पणी भी की, 'आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होंगी? गुरुवार को दोनों को दोषी माना गया था।
करीब चार वर्ष पहले रामगढ़ पचवारा के निकट सिसोदिया गांव निवासी कालूराम मीना (27) व संजू मीना (23) एक विवाहिता का अपहरण कर कार में बिठाकर ले गाए। रास्ते में उन्होंने नदी क्षेत्र में महिला से सामूहिक बलात्कार किया। जब महिला ने सबको बताने की धमकी दी तो उसकी गला घोंटकर हत्या कर शव कुएं में डाल दिया।
गूंजती है आज भी फिजा में हजारों सिसकियां, घुट-घुट कर तड़पती हैं इस समाज में बेटियां किस्सा बलात्कार का आज फिर अखबार में छपेगा, एक बेटी के खून से आज फिर अखबार सनेगा, क्या था कसूर मेरा क्या बेटी होना ही कसूर था मेरा कैसे जीए इस समाज में नारी, जहां दरिंदे बसते हों, भेड़ियों ने जहां इंसान के चेहरे पहने हो आखिर कब तक नारी की इज जत यूं तार-तार होगी, आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होंगी।
कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में अन्य वकील भी खड़े रह कर फैसला सुनने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही एडीजे ने विभिन्न धाराओं के तहत दोनों दरिंदों के खिलाफ धारा 302 के तहत फांसी की सजा का शब्द बोला तो खुशी की लहर दौड़ पड़ी और तालियां बज उठी। बाद में जब एडीजे ने दोनों आरोपियों को मृत्यु होने तक फांसी के फंदे पर लटकाने की बात कही तो दोबारा फिर तालियां बज उठी। वकीलों ने इसे एक ऐतिहासिक निर्णय बताया।
न्यायालय में मृतका के पिता, वृद्ध सास, पति, भाई व अन्य परिजनों के साथ बेटे व बेटी भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि बीते चार साल का समय उनके लिए बड़ा कष्ट भरा रहा, लेकिन न्यायालय से उम्मीद थी कि न्याय जरूर मिलेगा। आज मृतका की आत्मा को भी सुकून मिला होगा। मृतका के बेटे व बेटी मां की याद में गुमशुम ही नजर आए। मृतका के भाई ने बताया कि बीते चार साल से उनकी जिदगी एक ही मकसद रहा कि बहन के हत्यारों को फांसी की सजा मिले और इसी न्याय की उम्मीद में वह तारीख पर हाजिर होता था।