
दौसा ग्रामीण. कुण्डल. न कंठ तर करने को पानी, न पढ़ाई करने के लिए पर्याप्त कक्षा-कक्ष, खुले में पकता पोषाहार एवं सुरक्षा के नाम पर कंटीलें तारों की तारबंदी। इससे गांव के बाहर नदी के समीप सरिस्का जंगल से सटा हुआ क्षेत्र होने के कारण हर समय जंगली जानवरों का भय। यह हाल है ग्राम पंचायत भांवता-भंावती के राजकीय उ"ा प्राथमिक विद्यालय बगडेड़ा का। चुनावी शोरगुल में विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने एवं पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराने का मुद्दा कहीं नजर नहीं आ रहा है।
विद्यालय में 6 कमरे हैं। इसमें से एक कमरा कार्यालय एवं दूसरा पोषाहार आदि सामग्री रखने के काम में आ रहा है। मजबूरी में एक-एककमरे में दो -दो कक्षाओं को एक साथ बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है। वार्डपंच महेश मीना ने बताया कि विद्यालय की स्थिति से उ"ााधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे विद्यार्थियों के साथ ही विद्यालय प्रशासन को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। संस्था प्रधान ओमप्रकाश शर्मा का कहना है कि विद्यालय में कक्षा-कक्षों का अभाव है।
खुले में पकता है पोषाहार
विद्यालय में पोषाहार पकाने के लिए रसोईघर भी नहीं है। ऐसे में खुले स्थान पर विद्यालय स्थित होने के कारण उडऩे वाली धूल से बचाव के लिए वैकिल्पक व्यवस्था के तहत बरामदे में पोषाहार पकाया जाता है। चूल्हे पर पोषाहार पकाने से उठने वाला धुआं कक्षा-कक्ष में पहुंचने से विद्यार्थियों को असुविधा होती है।
जंगली जानवरों का रहता है भय
विद्यालय के चारों ओर करीब 420 में से केवल करीब 60 मीटर में ही पक्की दीवार बनी हुई है। अधूरी चारदीवारी के स्थान पर कंटीले तारों से तारबन्दी की गई है। जबकि विद्यालय के आस-पास रेतीले टीलों एवं गहरे गड्ढों में सियार, जंगली बिलाव, जरख एवं भेडिय़ें आदि जंगली जानवर भी आ जाते हैं।
पेयजल की भी नहीं सुविधा
विद्यालय में पेयजल की भी कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को विद्यालय से बाहर जाकर टंकी से प्यास बुझानी पड़ती है। मजबूरी में विद्यार्थियों को पीने के पानी के लिए घर से बोतल भी लानी पड़ती है। इससे खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।