
लालसोट. एशिया के सबसे बड़े कच्चे व जिले के सबसे बड़े बांध मोरेल बांध पर रविवार को प्रवासी व आवासीय जलीय पक्षियों की गणना की गई। एशियन वाटरबर्ड सेंसस की गणना में मोरेल बांध पर 6हजार275जलीय पक्षी मिले हैं। पक्षी विशेषज्ञ डॉ सुभाष पहाडिय़ा ने बताया कि वेटलैंड्स इंटरनेशनल और वन विभाग की ओर से रविवार को मोरेल बांध पर एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2024 के अंतर्गत जलीय पक्षियों की गणना की गई। इसमें 4 समूहों के 15 विशेषज्ञ सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान जिला कलक्टर देवेंद्रकुमार ने भी प्रवासी पक्षियों का अवलोकन किया।: मौसम साफ होने के कारण छह घंटे तक बांध के पूरे क्षेत्रफल में गणना हुई। गणना में 87 प्रजातियों की पहचान की गई, जिनमें 70 प्रवासी व 18 आवासीय प्रजातियां चिन्हित की गई। इस दौरान दुर्लभ पक्षियों की 8 प्रजातियां नजर आर्ई।
गणना में 1 एनडेन्जर्ड, 2 वल्नरेविल और 5 नियर थ्रेटेन्डेड प्रजातियों की पहचान की गई। जिनमें डालमेशन पेलिकन, इंडियन स्कीमर, रिवर टर्न, पेन्टेड स्टार्क, ब्लैक टेल्ड गोडविट, ब्लैक हेडेड आईबिश, कॉमन पोचार्ड, यूरेशियन कल्र्यू ,वूली नेक्ड स्टार्क शामिल हैं। गणना में ग्रेट कॉर्मोरेंट 1028, कॉमन कूट 650 ,ग्रेट व्हाइट पेलिकन156 762 , पाइड एवोसेट 75, ब्लैक-टेल्ड गोडविट 175 सहित कॉमन टील 75, नोर्दन पिनटेल 56 और फ्लेमिगों 120 की संख्या में दर्ज किए गए।
इस दौरान वन विभाग के रेंजर जगदीश नरायन मीना अपनी टीम के साथ एवं सवाई माधोपुर के प्रोफेसर रामलाल बैरवा,जुगराज बैरवा,वनपाल व वनरक्षक अनूपसिंह,पूनम मीना, उम्मेद सिंह ,सुमन बाई मीना,शर्मिला मीना,धर्मेंद्र सिर्रा, पूजा मीना,नम्रता मीना ने भी पक्षियो की पहचान व गणना का कार्य किया।
पक्षी विशेषज्ञ प्रोफेसर सुभाष पहाडिय़ा ने बताया कि मोरेल बांध पर पक्षियों की जनसंख्या का घनत्व उच्च स्तरीय है, जिससे इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित होने की संभावनाएं हैं।