
दौसा. जिला चिकित्सालय में मरीजों के परिजनों के विश्राम के लिए लाखों रुपए की लागत से बनाई गई राजकीय धर्मशाला कई माह से बंद होने के कारण धूल फांक रही है। इससे मरीजों के परिजनों को ठहरने के लिए समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मजबूरी में उन्हें वार्ड में इधर-उधर ही रात गुजारनी पड़ती है।
जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय में रोजाना करीब 1500 से 2000 मरीज आउटडोर में परामर्श के लिए आते हैं। इनमें से काफी संख्या में मरीज भर्ती होकर भी उपचारित होते हैं। ऐसे में अधिक दिनों तक भर्ती होकर उपचार कराने वाले मरीजों के परिजनों को ठहरने की समुचित सुविधा के लिए लाखों रुपए की लागत से राजकीय धर्मशाला का निर्माण कराया गया था। इसमें कई कमरे एवं शौचालय आदि सुविधाएं भी निर्मित की गई है।
इस धर्मशाला का 7 जून 2016 को विधिवत उद्घाटन होने के बाद इसे शुरू भी कर दिया गया था, लेकिन बाद में वापस बंद कर दिया गया। इससे मरीजों एवं उनके परिजनों को रात में ठहरने की समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में लोगों को वार्ड में नीचे या इधर-उधर ही रात गुजारनी पड़ती है। इससे उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इनकी सुविधाओं से किसी का कोई सरोकार नजर नहीं आ रहा है।
खास बात यह है कि धर्मशाला के मुख्य द्वार पर चिकित्सालय प्रशासन की ओर से इसमें ठहरने के आवश्यक दिशा निर्देश एवं नियम आदि के बारे में जानकारी भी अंकित की गई है, लेकिन धर्मशाला में ठहरने की सुविधा सुचारू नहीं होने से मायूसी ही हाथ लग रही है।
कंटीली झाडिय़ां उग आई
राजकीय धर्मशाला के उपयोग में नहीं आने के कारण इसके आस-पास कंटीली झांडियां एवं घास-फूस उग गए हैं। इससे गंदगी का आलम बिखरा दिखाई देता है। वहीं धर्मशाला बंद रहने से लोग भी यहां इधर-उधर गंदगी फेेंक जाते है। ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन की भी धज्जियां उड़ती हुई दिखाई दे रही है।
रैन बसेरे में भी गंदगी का आलम
जिला चिकित्सालय में एक दानदाता की ओर से बनाया गया रैन बसेरा भी देखरेख के अभाव में गंदगी एवं धूल से अटा पड़ा है। इसके अलावा यहां बिस्तर एवं पलंग आदि अन्य सुविधाएं भी नहीं है। इससे किसी भी मरीज के परिजन यहां ठहरने में रुचि नहीं दिखाते हैं।
इनका कहना है...
जिला चिकित्सालय में मरीजों के परिजनों के लिए राजकीय धर्मशाला पहले शुरू की गई थी, लेकिन लोगों ने इसमें ठहरने में लोगों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। मेडिकल रिलीफ सोसायटी की बैठक में इस संबंध में बात हुई है। ऐसे में जिला कलक्टर के निर्देशानुसार कार्य किया जाएगा।
डॉ. सीएल मीना, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय, दौसा