Mamta Chaudhary: राजनीतिक कार्यकर्ताओं से लेकर शहरवासियों में अब सभापति का चार्ज किसे मिलेगा, इसे लेकर चर्चाओं का दौर चल पड़ा है।
दौसा। नोटिस देने के करीब एक माह बाद आखिर नगर परिषद सभापति ममता चौधरी को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ सरकार को भ्रष्टाचार के संबंध में शिकायत मिली थी। इस पर अतिरिक्त जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई थी। 2 जुलाई को प्रेषित कमेटी की रिपोर्ट के बाद 10 सितम्बर को स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक व विशिष्ट सचिव कुमार पाल गौतम ने 5 आरोपों के संबंध में प्रथम दृष्टया अनियमिताएं व पद का दुरुपयोग होना पाए जाने पर नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा था। नोटिस का जवाब संतोषप्रद नहीं होने पर निदेशक ने सोमवार को आदेश जारी कर ममता चौधरी को सभापति व सदस्य पद से निलंबित कर दिया।
गौरतलब है कि यह जिले में तीसरी नगर निकाय से कांग्रेस का विकेट उड़ा है। इससे पूर्व लालसोट पालिकाध्यक्ष रक्षा मिश्रा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर उन्हें पद गंवाना पड़ा था। हाल ही में महुवा नगर पालिका अध्यक्ष नर्बदा देवी गुर्जर को सरकार ने निलंबित किया और अब दौसा नगर परिषद सभापति पर गाज गिरी है।
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक ने आदेश में बताया कि ममता चौधरी के खिलाफ प्रकरण सरकार ने न्यायिक जांच कराने का निर्णय किया है एवं प्रकरण को विधि विभाग को भेजा जा चुका है। चौधरी के पद पर बने रहने से विचाराधीन न्यायिक जांच को प्रभावित करने की संभावना है। ऐसे में उन्हें सभापति व सदस्य पद से निलंबित किया गया है। वहीं, ममता चौधरी ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप झूठे हैं। बिना भेदभाव विकास कार्य कराए गए। भाजपा में शामिल हो जाते तो सरकार निलंबित नहीं करती, लेकिन हमारा परिवार पैतिृक रूप से कांग्रेस में रहा है। अब न्यायालय की शरण ली जाएगी।
एडीएम दौसा की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने नगर परिषद सभापति ममता चौधरी के खिलाफ भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. प्रभुदयाल शर्मा व पूर्व पालिकाध्यक्ष सुरेश घोषी द्वारा सौंपी गई शिकायतों को लेकर जांच की थी। दोनों ने ही एक दर्जन से अधिक मामलों को लेकर आरोप लगाए थे। हालांकि जांच रिपोर्ट के बाद सरकार ने पांच मामलों को लेकर ही नोटिस जारी किया था। इनमें मोक्षधाम में सामुदायिक भवन का नामकरण सत्यनारायण चौधरी के नाम पर बिना बोर्ड बैठक में निर्णय लेकर करने, स्वयं की खातेदारी व अन्य खाली भूमि के ऊपर से जा रही 33 केवी हाइटेंशन लाइन को अंडरग्राउंड विस्थापीकरण के संबंध में बोर्ड बैठक में अनुमोदन नहीं लेना, खसरा नंबर 1441 के प्रकरण में अनियमितता, प्रत्येक वर्ष में छह बोर्ड बैठक बुलाने के प्रावधान की पालना नहीं करना तथा नेताजी सुभाषचंद बोस आवासीय योजना में भूखण्डों की नीलामी के संबंध में बोर्ड बैठक में प्रस्ताव नहीं लेने का मामला है।
सूत्रों ने बताया कि निलंबन को लेकर कई दिनों से उठापटक चल रही थी। भाजपा में ही एक गुट आगामी उपचुनाव में वैश्य वर्ग की नाराजगी को देखते हुए फिलहाल निलंबन के पक्ष में नहीं था। वहीं भाजपा में सभापति बनने को लेकर भी कई दावेदार होने के लेकर गुटबाजी होने की आशंका थी। इन विषयों को लेकर उच्च स्तर पर काफी मंथन चला, लेकिन आखिर में विरोधी पार्षद एकजुट होकर लामबंद हुए तो निलंबन पर मुहर लग गई।
राजनीतिक कार्यकर्ताओं से लेकर शहरवासियों में अब सभापति का चार्ज किसे मिलेगा, इसे लेकर चर्चाओं का दौर चल पड़ा है। सामान्य वर्ग से भाजपा की चार-पांच महिला पार्षदों ने तो प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। वहीं लालसोट पैटर्न पर दो-तीन कांग्रेस की पार्षद भी भाजपा में शामिल होकर सत्तासीन होने में लगी हुई है। इसके चलते शहर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।