रेलवे जीएम के निरीक्षण में किया था दिखावा, पार्क व स्टेशन के विकास पर हुए थे करोड़ों रुए खर्च
बांदीकुई. रेल महाप्रबंधक के आने से पहले रेलवे स्टेशन एवं पार्क को रंग-बिरंगे गमलों से सजाया गया, लेकिन महाप्रबंधक के जयपुर रवाना होने के साथ ही पार्क एवं स्टेशन से गमले गायब होने के साथ ही रौनक भी वापस लौट गई। स्थानीय रेल प्रशासन ने गमलों को चौपहिया वाहन में रखकर अन्यत्र भेज दिया है। इससे पार्क की हरियाली भी कम हो गई है। रेल सूत्रों के मुताबिक रेलवे कॉलोनी में अंग्रेजी बाजार के समीप करीब 60 लाख रुपए की लागत से सर्वसुविधायुक्त पार्क विकसित किया गया। इस पार्क में घास लगाने सहित हरियाली को बढ़ावा दिए जाने के लिए राजगढ़ की एक नर्सरी को जिम्मेदारी सौंपी गई।
जहां सोमवार को रेल प्रबंधक द्वारा पार्क का लोकार्पण करने से पहले इस नर्सरी से ही गमले मंगवाकर पार्क को चारों ओर से सजाया गया, लेकिन जीएम के फीता काटकर उदघाटन करने के कुछ ही देर बाद एवक चौपहिया वाहन में रखकर गमलों को वापस भेज दिया गया। वहीं रेलवे स्टेशन एवं सुलभ कॉम्पलैक्स के बाहर भी गमले लगाए गए थे, लेकिन यहां से भी गमले गायब हो गए हैं। अभी जिन जगहों पर गमले लगे हुए थे। वहां यात्री फर्श पर आराम करते दिखाई देने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि गमले लगाने पर स्टेशन एवं पार्क के सौन्दर्यकरण को बढ़ावा मिलने से आकर्षक दिखाई देने लगा, लेकिन रेल प्रशासन ने गमलों को वापस भेजकर स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने बताया कि यह रेलवे स्टेशन ए श्रेणी का स्टेशन है। यहां से प्रतिदिन करीब 8हजार यात्री आवाजाही करते हैं और करीब 5 लाख रुपए की राजस्व आय होती है, लेकिन रेलवे की ऐसी क्या मजबूरी बनी की आनन-फानन में गमले मंगवाकर लगाने पड़े और उन गमलों को वापस भेजना पड़ा।
जबकि इन गमलों पर कोई ज्यादा बजट भी खर्च नहीं हो रहा था। मंगलवार सुबह पार्क में भ्रमण पर आए लोगों ने भी गमले गायब देख स्थानीय रेल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। सिकंदरा रोड निवासी राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि जब पार्क पर इतना बजट खर्च किया है तो गमले हटाया जाना विभागीय अधिकारियों के मन में खोट दर्शाता है। रेलवे कॉलोनी में प्रतिदिन करीब एक हजार से अधिक लोग भ्रमण पर आते हैं। रेलवे कॉलोनी में भी सैंकड़ों रेलकर्मी रहते हैं।
यहां पार्क की सार-संभाल के लिए कर्मचारी भी लगा रखे हैं। तो फिर सुरक्षा को लेकर भी कोई खतरा नहीं था। उन्होंने बताया कि इस मामले की मण्डल रेल महाप्रबंधक से शिकायत कर मामले की जांच कराई जाएगी। बबलू सैन का कहना है कि स्टेशन के विकास पर जब करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। स्वच्छता के नाम पर भी केन्द्र सरकार बजट मुहैया करा रही है तो फिर ये गमले क्यों हटाए गए।
उन्होंने बताया कि जब कोई अधिकारी आता है। तो साफ-सफाई नजर आती है। यात्री सुविधाओं में भी इजाफा कर दिया जाता है, लेकिन अधिकारियों के लौटने पर स्थानीय कर्मचारी पुराने ढर्रे पर ही आ जाते हैं। इस बारे में जब स्थानीय रेल प्रशासन से मोबाइल पर बात करना चाहा तो इस बारे में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।