दौसा

हिन्दू शक्ति की कमी नहीं, आपसी एकता की है कमी-राघवाचार्य

धर्म जागृति सेवा सेस्थान ने बनाया भारतीय नववर्ष महोत्सव

2 min read
Mar 18, 2018

बांदीकुई. जगदगुरू अग्र देव पीठाधीश्वर डॉ राघवाचार्य महाराज ने कहा कि ह्रिन्दूओं की एकता तभी होगी जब संगठित हो। राघवाचार्य रविवार दोपहर सिकन्दरा रोड स्थित गणपति गाड़ऱ्न में आयोजित धर्म जागृति सेवा सेस्थान के तत्वाधान में भारतीय नववर्ष महोत्सव के75 वें पर्व पर अपने मुख्य अतिथि के पद से बोल रहे थे। उन्होंने कहा आज धन, शक्ति की कमी नहीं है कमी है तो आपसी एकता की। उन्होंने कहा कि आपस में मिल कर रहेगें तभी विकास होगा। उन्होंने परमपिता ब्रह्मा जी, युगाब्द और विक्रम संवत प्राचीन संवत का प्रारम्भ दिवस, मर्यादा पुरू षोत्तम श्री राम का राज्याभिषेक, शक्ति दात्री मॉ भगवती की उपासना का प्रथम दिवस व नवरात्रा स्थापना, महर्षि दयानंद सरस्वती के आर्य समाज, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराम बलीराम हेडगेवार के जन्म दिन के बारे में बताया।

वहीं नक्षत्र,झूलेलाल के जन्म दिवस के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि आज विश्व हिन्दू परिषद व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने इसको समझा। एक नहीं होगा तो देश के टुकडे -टुकडे होगें। उन्होंने जनगणना के आधार बताया कि आज हमारी संख्या घटती जा रही है। उन्होंने कहा कि परिवार में जन्म दिन मना रहे है तो मोमवत्ती को बुझा रहे है। कुल का दीपक बुझा रहे है। मात पिता केे प्रति बोल चाल ठीक नहीं है उसपर हमको चिन्तन करने की जरूरत है। हम बट जाएगें तो दूसरा समाज हावी हो जाएगा। मात- पिता गुरू की सेवा सत्य बोलना धर्म पर चलना जैसे पांच वाक्य बताए।

गलता गेट के महामण्डलेश्वर सियारामदास महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने आप के लिए भी चिंतन करना चाहिए। एकता में ही मानवता की एकता छीपी हुई है।बालयोगी गोरखनाथ आश्रम के महन्त मुकेश नाथ ? ने कहा कि शिक्षित होना अलग बात है लेकिन संस्कृति को भूलना अच्छी बात नहीं है। मां अपनी ममता से बालक का पोषण कर संस्कारित करें तो बालक दूसरी बात सोच ही नहीें सकता है।आज के परिवेश में कोई विश् वामित्र आपके घर आपके बालको को मांगने के लिए नहीं आएगा। घर में भाई चारा रखे।

गौ रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दू घटेगा तो देश बट जाएगा। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में जामडोली शक्तिपीठ की संस्थापिका समदर्शी दीदी ने अपने ओजस्वी भाषण में मातृ शक्ति को झकझोरते हुए कहा कि मां ही पहला गुरू होती है जो कोरे मन पर बालक ा जीवन लिखती है। वहीं चाहे तो मा को माताजी वोही चाहे तो मोम बना सकती है पिता को पिताजी या डेड कहलवा सकती है।उन्होंने कहा कि यदि कोई नृतिका या गायक कलाकार इस मंच पर आकर आपना नृत्य दिखाती तो युवाओं से पांडाल भर जाता और आज धर्म व संस्कृति की बात हो रही है तो हम बुजुर्ग लोग सीमित संख्या में आ गए। क्रूा संस्कार मिलने वाला है अपने बालको में।अभी समय है हमको समझना पडेंगा। हिन्दूओं में एकता का संचार करना पडेगा।

उन्होंने कहा कि पहली रोटी गाय को देनी चाहिए उसको बंद कर पति को देना शुरू कर दियाजिसका परिणाम है पति निर्बल बन गया। हमको हमारी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। इसी प्रकार धम्र सभा में विभिन्न संतो ने अपने विचार रखे कार्यक्रम की अध्यक्षता महामण्डलेश्वर दयालदास महाराज ने की। कार्यक्रम का शुभारॅम्भ मर्यादा पुरूषोत्त श्री राम के चित्र के समुख दीप जलाकर किया। पांडाल में महिला एवं पुरूषो की भीड रही। इस मौके पर डॉ.सोहनलाल, बैद्य बलवीरसिंह,रायसिंह गुर्जर, देवी सहाय, राजेन्द्र लाटा,विष्णु कुमार, श्याम सुन्दर अग्रवाल, प्रभू दयाल गुप्ता, बाबूलाल धनावडय़ा, श्याम सुन्दर खण्डेलवाल, डॉ धर्म सिंह मीना ,नवीन गुर्जर, रामगोपाल सैनी, आदि मौजूद रहे।

Published on:
18 Mar 2018 07:23 pm
Also Read
View All