खराब खानपान, ज्यादा स्क्रीन टाइम और आउटडोर खेलों की कमी के कारण बच्चों की नजर कमजोर हो रही है। दौसा जिले समेत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में हुए आई स्क्रिनिंग कार्यक्रम के आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है।राजस्थान में चार साल में रिफ्रेक्टिव एरर वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़कर 9.21 फीसदी तक पहुंच गई […]
खराब खानपान, ज्यादा स्क्रीन टाइम और आउटडोर खेलों की कमी के कारण बच्चों की नजर कमजोर हो रही है। दौसा जिले समेत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में हुए आई स्क्रिनिंग कार्यक्रम के आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है।राजस्थान में चार साल में रिफ्रेक्टिव एरर वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़कर 9.21 फीसदी तक पहुंच गई है। यानी हर 100 में से करीब 10 स्कूली बच्चों की आंखें कमजोर पाई गई है। जबकि चार साल पहले तक ये आंकड़ा 7.25 फीसदी था। प्रदेश के नौनिहालों के नेत्रों की ये स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
दौसा शहर का नितिन तीसरी कक्षा में पढ़ता है। कम दिखाई देने पर उसे डॉक्टरों को दिखाया। नजर कमजोर मिलने पर उसके करीब नौ साल की उम्र में चश्मा लगाना पड़ गया। वह मोबाइल व टीवी ज्यादा देख रहा था। बाहर खेलने नहीं जाता था।
लालसोट की मीनू के सिर में दर्द रहने लगा। उसे डॉक्टरों को दिखाया तो आंखें कमजोर मिली। वह अभी सातवीं कक्षा में पढ़ती है। उसके चश्मा लगना पड़ा है। नियमित आई ड्रॉप भी डाल रही है। वह हरे पत्तेदार सब्जी कम खा रही थी।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में प्रदेश में 9,50,817 बच्चों की स्क्रीनिंग में 68,904 बच्चों में दृष्टि दोष पाया गया, जो 7.25 प्रतिशत रहा। वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गया। इस साल 8,65,250 में से 66,985 बच्चों की आंखें कमजोर मिली।इसके बाद 2024-25 में 9,37,729 बच्चों की जांच में 80,389 बच्चों में रिफ्रेक्टिव एरर मिला, जो 8.57 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं वर्ष 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) में 5,56,437 बच्चों की स्क्रीनिंग में 51,239 बच्चों में यह समस्या सामने आई, जो 9.21 प्रतिशत के साथ अब तक का सबसे बड़ा स्तर है।
कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में चार साल में 2.32 लाख बच्चों को चश्मे वितरित किए हैं। इनमें 2022 में 62961, 2023 में 55721, 2024 में 71098 तथा दिसंबर 2025 तक 47279 चश्मों का वितरण किया गया।
खेल विशेषज्ञों की मानें तो जिले में आउटडोर खेलों की कमी है। जिला मुख्यालय पर भी स्टेडियम की दशा सही नहीं है। सोचनीय बात है कि जिले में एक भी सिंथेटिक ट्रेक नहीं है। इसके अलावा अभिभावक भी छोटे बच्चों को खुद मोबाइल थमा रहे हैं।
खानपान में हरी सब्जी व प्रोटीन का उपयोग ज्यादा किया जाए। मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल बंद किया जाए या कम किया जाए। फास्ट फूड का सेवन भी सही नहीं है। समय पर जांच करवाई जाए। बच्चों को आउटडोर गेम्स जरूर खिलाएं।
डॉ प्रमोद मीणा, नेत्र रोग विशेषज्ञ, आरके जोशी अस्पताल दौसा