राजस्थान में पहली ट्रेन वर्ष 1874 में आगरा से बांदीकुई के मध्य संचालित हुई थी। उस समय भाप के इंजन से ट्रेनें चलती थीं।
बांदीकुई। रेलनगरी बांदीकुई में लोकोमोटिव स्टीम इंजन को मॉडल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके लिए जीआरपी थाने के सामने प्लेटफार्म नंबर एक के बाहर 26 बाय 15 मीटर जगह को मण्डल स्तर पर प्रस्तावित किया गया है। इससे न केवल बांदीकुई में रेल विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि शहर को हेरिटेज लुक भी मिलेगा।
जानकारी के अनुसार राजस्थान में पहली ट्रेन वर्ष 1874 में आगरा से बांदीकुई के मध्य संचालित हुई थी। उस समय भाप के इंजन से ट्रेनें चलती थीं। इस परंपरागत रेल इतिहास को संरक्षित करने के लिए स्थानीय विधायक भागचंद सैनी टांकड़ा ने रेल म्यूजियम और स्टीम इंजन स्थापना की मांग कई स्तरों पर उठाई थी।
उच्च स्तर से एसएस, एसएसई वर्क एवं एसएसई सीएंडडब्ल्यू अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी को जगह चिह्नित करने के निर्देश दिए गए थे। रेलवे की ओर से गोल्डन रॉक वर्कशॉप, दक्षिण रेलवे से एक स्टीम लोकोमोटिव इंजन बांदीकुई में प्रदर्शित करने के लिए दिया जाएगा।
उत्तर-पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ शशि किरण ने बताया कि इस इंजन के प्रदर्शित होने से रेलवे के इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी और बांदीकुई शहर को हेरिटेज लुक भी मिलेगा। वर्तमान में बांदीकुई जंक्शन से जयपुर, आगरा एवं दिल्ली के लिए सीधी ट्रेनें हैं। वहीं मेहंदीपुर बालाजी सहित अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी यात्री आवागमन काफी है।
राजस्थान से जुड़ी हर ताज़ा खबर, सीधे आपके WhatsApp पर
जुड़ें अभी : https://bit.ly/4bg81fl