दौसा

जिले के 23 सरकारी अस्पतालों में एक भी नहीं गूंजी किलकारी

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Nov 10, 2018
dausa cmho
जिले के 23 सरकारी अस्पतालों में एक भी नहीं गूंजी किलकारी

दौसा ग्रामीण. सरकार की ओर से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए भले ही करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे है, लेकिन जिले के एक तिहाई सरकारी अस्पतालों ने संस्थागत प्रसव से दूरी बना रखी है। पिछले कई वर्षों से कमोबेश यही स्थिति चली आ रही है। मजबूरी में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए दूर-दराज या निजी अस्पतालों में जाने के साथ ही काफी संख्या में घर पर भी प्रसव हो रहे हैं। ऐसे में एक वर्ष में ही लक्ष्य के मुकाबले जिले में करीब 8 हजार संस्थागत प्रसव कम हो सके हैं।


जानकारी के अनुसार जिले में जिला चिकित्सालय सहित 62 सरकारी अस्पताल संचालित हैं। इनमें वर्ष 2017-18 में जिले के 23 अस्पतालों में तो एक भी प्रसव नहीं हुआ है। दौसा ब्लॉक में 6, बांदीकुई में 4, महुवा में 2 , सिकराय में 4 एवं लालसोट ब्लॉक में 5 अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा दो शहरी पीएचसी में भी डिलेवरी नहीं हो रही हैं।

वहीं 9 अन्य अस्पतालों में भी वर्षभर में 10 से कम संस्थागत प्रसव हुए हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए दूर-दराज के अस्पतालों में जाना पड़ता है। इससे गर्भवती एवं उनके परिजनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चिकित्सा विभाग की ओर से इन अस्पतालों में संसाधनों को बढ़ावा देने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे है। मात्र नोटिस देकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है।


यहां नहीं हुए


दौसा ब्लॉक के आलूदा, बापी, छारेड़ा, खानवास, नांगल बैरसी, तीतरवाड़ा, बांदीकुई में बडिय़ाल कलां, प्रतापपुरा, पूंदरपाडा, लालसोट में गोल, कल्लावास, शिवसिंहपुरा, श्यामपुरा, महुवा में बडागांव, खोर्रा मुल्ला, सिकराय में भण्डारी, दुब्बी, नांदरी, टोरडा में वर्ष 2017-18 में एक भी संस्थागत प्रसव नहीं हुए हैं। इसके अलावा खारण्डी, खवारावजी, कुण्डल, अरनिया, बिवाई, गोलाडा, बगरी, दौलतपुरा, गुढाचन्द्रजी रोड़ स्थित अस्पताल में भी 10 से कम प्रसव हुए हैं।


सिजेरियन तो दूर की कौड़ी


जिले में 5 दर्जन सरकारी अस्पताल होने के बावजूद केवल मात्र जिला अस्पताल में ही सिजेरियन डिलेवरी हो पा रही है। बांदीकुई, लालसोट, महुवा एवं सिकराय क्षेत्र की महिलाओं को गंभीर स्थिति में दौसा या जयपुर रैफर करना पड़ता है। इससे कई बार महिलाओं की जान पर बन आती है।

62 जिले में सरकारी अस्पताल
23अस्पताल एक भी प्रसव नहीं
9 अस्पताल में दस से कम प्रसव हुए
38185 संस्थागत प्रसव का लक्ष्य
31739 कुल प्रसव हुए

जिला चिकित्सालय में बढ़ रहा दबाव
जिले की सभी पीएचसी एवं सीएचसी पर संस्थागत प्रसव नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को जिला चिकित्सालय में आना पड़ रहा है। गत वर्ष 2072 लक्ष्य के मुकाबले 10 हजार 811 प्रसव हुए हैं। ऐसे में चिकित्सालय में संसाधनों की कमी अखरने
लगी है।

जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव के लिए कार्ययोजना बनाकर काम किया जाएगा। इसके अलावा अन्य संसाधन मुहैया कराकर अस्पतालों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं।
डॉ. ओपी बैरवा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, दौसा

Updated on:
10 Nov 2018 08:13 am
Published on:
10 Nov 2018 08:13 am