दौसा

बीस लाख की आबादी के लिए मात्र दो दर्जन एम्बुलेंस

Only two dozen ambulances for a population of two million: वेंटिलेटर पर चिकित्सा व्यवस्था: जिलेभर में अस्पतालों के सामने इन एम्बुलेंसों की संख्या बहुत ही कम है।
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Jan 14, 2020
बीस लाख की आबादी के लिए मात्र दो दर्जन एम्बुलेंस
बीस लाख की आबादी के लिए मात्र दो दर्जन एम्बुलेंस

दौसा. जिले में बीस लाख की आबादी पर सरकार ने मात्र दो दर्जन एम्बुलेंस ही लगा रखी है। इससे मरीजों को चिकित्सालयों तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। राजस्थान सरकार ने एम्बुलेंस एकीकृत सेवा योजना की शुरुआत की थी, ताकि विभिन्न हादसों में घायल लोगों को नजदीक के अस्पतालों में एम्बुलेंस 108 से पहुंचाया जाए। वहीं एम्बुलेंस 104 से प्रसूताओं को अस्पताल तक पहुंचाया जाए और फिर उनको अपने निवास पर छोड़ा जाए। इसके बावजूद व्यवस्था कमजोर है।

Only two dozen ambulances for a population of two million


जिले में 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है और 315 उप स्वास्थ्य केन्द्र संचालित हैं। करीब पौने चार सौ सरकारी अस्पतालों पर 108 योजना की मात्र 13 एम्बुलेंस है।इसमें से भी गीजगढ़ की एम्बुलेंस खराब है। 108 एम्बुलेंस में घायलों को आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। 12 एम्बुलेंस 104 योजना की है। इनमें प्रसूताओं को सरकारी अस्पताल तक लाना व उनको अस्पताल से उनके घर पहुंचाने का काम है। जिलेभर में अस्पतालों के सामने इन एम्बुलेंसों की संख्या बहुत ही कम है।

हाइवे पर आए दिन होती है सड़क दुघर्टना


जिले से जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग व मनोहरपुर-कौथून राष्ट्रीय राजमार्ग गुजर रहे हैं। इन राजमार्गों पर प्रतिदिन हादसे होते हैं। इनके अलावा भी कई सड़क मार्ग ऐसे हैं, जिन पर वाहनों का दबाव है। वहां भी आए दिन हादसे होते हैं।

आउटडोर के हिसाब से एम्बुलेंस कम


बांदीकुई. मरीजों को रैफर किए जाने पर राजकीय चिकित्सालयों मेें एम्बुलेंस सुविधा तो हैं, लेकिन मरीजों के आउटडोर के हिसाब से एम्बुलेंस की संख्या कम हैं। राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बांदीकुई का आउटडोर करीब 6 सौ से 7 सौ मरीजों का प्रतिदिन है। यहां मात्र एक एम्बुलेंस है। जो भी बड़ी है। जबकि यहां से आए दिन मरीज रैफर होते हैं। ऐसे में एक मरीज को रैफर कर देने पर चिकित्सालय की एम्बुलेंस लेकर चली जाती हैं, लेकिन इसके बाद यदि किसी मरीज को रैफर किया जाता है तो फिर उसे निजी एम्बुलेंस ही लेकर जानी पड़ती है।

इस चिकित्सालय में महुवा, सिकराय, राजगढ़ एवं बसवा तहसील क्षेत्र तक के मरीज ईलाज के लिए आते हैं। ऐसे में यदि एक छोटी एम्बूलेंस की सुविधा मिल जाए तो मरीजों के लिए राहत मिल सकती है। इसके अलावा बसवा में छोटी एम्बुलेंस हैं, लेकिन उस पर चालक कार्यरत नहीं है। ऐसे में रैफर किए जाने पर सहायक कर्मचारी ही एम्बुलेंस से मरीज को लेकर जाता है। इससे खासी परेशानी होती है। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना में गुढ़ाकटला व लोटवाड़ा में 104 एम्बुलेंस की भी सुविधा है। खास बात यह है कि अलवर-सिकंदरा मेगा हाइवे पर भी आए दिन दुर्घटनाए होती हैं। ऐसे में एक एम्बुलेंस की अतिरिक्त व्यवस्था होनी चाहिए।

Only two dozen ambulances for a population of two million

Published on:
14 Jan 2020 08:24 am