
बांदीकुई. राजस्थान पत्रिका की ओर से रविवार को पुलिस थाने के पीछे स्थित उपाध्याय सैण्ट्रल पब्लिक स्कूल में जन एजेंडा 2018-2023 को लेकर प्रबुद्ध जनों की बैठक आयोजित हुई। इसमें सेवानिवृत व्याख्याता इन्दुकुमार शर्मा ने आगरा फाटक जाम व पानी की समस्या को क्षेत्र के लिए नासूर बताते हुए चुनावी एजेंडेे में शामिल किए जाने की मांग रखी।
पार्षद बाबूसिंह गुर्जर ने सीवरेज योजना लागू करने, एडवोकेट धर्मेन्द्र शर्मा ने मुख्य बाजार में बिजली के खंभों को हटाकर अण्डरग्राउण केबल बिछाकर बिजली सप्लाई सुचारू करना कार्य योजना में शामिल करने के लिए कहा।
एडवोकेट अरूण वर्मा ने सर्वसुविधायुक्त 100 बैड का हॉस्पीटल एवं स्टेडियम के निर्माण, राधारमण तिवाड़ी ने शहर में डिस्पेंसरी संचालित करने व अन्यत्र सर्वसुविधायुक्त चिकित्सालय खोलने, लक्ष्मीनारायण अगावली ने अधिकारियों के रिक्त पद भरने, प्रमोद व्यास ने मीठा पानी मुहैया कराने के लिए ईस्ट कैनाल परियोजना से रेहडिय़ा बांध को जोडक़र बसवा व बांदीकुई को पानी मुहैया कराने, इन्द्रजीतसिंह प्रभाकर ने महिला महाविद्यालय सरकारीकरण, पार्षद सुरेन्द्र मीणा ने स्थानीय व्यक्ति को प्रत्याशी बनाने, सुरेश शाहरा ने कचरा निस्तारण केन्द्र खोलने एवं अवधेश उपाध्याय ने ट्रेनों का ठहराव एवं रेलवे का कारखाना खोलने के लिए मांग रखी।
पार्षद रतनसिंह गुर्जर ने रेलवे कॉलोनी को विकसित किए जाने व शहर में पार्किंग की व्यवस्था करने की मांग रखी। इसके अलावा पर्यटन स्थल आभानेरी एवं धार्मिक स्थल झाझीरामपुरा का विकास करने, पॉलोटेक्नीक कॉलेज खोलने, रीको औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने, सिकंदरा रोड पर सब्जी मण्डी खोलने की मांग उठाई। इस मौके पर मुकेश माल, साहिल मिश्रा एवं अरूण शर्मा ने भी आगरा लाइन को केशापुरा फाटक से दिल्ली लाइन से जोडऩे, सरकारी विद्यालयों में कृषि संकाय खोलने की भी मांग रखी।
सरपंच संघ ने भी किया मांगों का समर्थन
बांदीकुई. पंचायतीराज सेवा परिषद जयपुर के आहवान पर चल रहे अनिश्चित कालीन असहयोग आंदोलन व सामूहिक अवकाश का सरपंच संघ ने भी समर्थन किया है। सरपंच संघ अध्यक्ष गोपालसिंह नांगल ने बताया कि सेवा परिषद एवं सरकार के बीच ९ बार समझौते हो चुके हैं, लेकिन समझौते को लागू नहीं किए जाने से ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत प्रसार अधिकारी सहित अन्य संगठन आन्दोलन कर रहे हैं।
कार्य का बहिष्कार कर देने से पंचायतीराज की योजनाएं ठप होने के साथ ही लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। ऐसे में यदि सेवा परिषद के समझौते को लागू नहीं किया गया तो सरपंच संघ भी कार्य का बहिष्कार कर ग्राम पंचायतों के तालाबंदी करने पर उतारू होगा।