
बांदीकुई. शहर में अब कम-अधिक वोल्टेज होने की समस्या एवं गड़बड़ाती विुद्यत सप्लाई से होने वाली परेशानी से उपभोक्ताओं को शीघ्र निजात मिल सकेगी। इसके लिए इंटीग्रेटेड पावर डवलपमेंट योजना (आईपीडीएस) के तहत शहरी विद्युत वितरण व्यवस्था में सुधार कार्य पर करीब 2.42 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके लिए ओरियंटल सैल्स कॉर्पोरेशन कंपनी से अनुबंध के बाद श्यालावास खुर्द में 33/11 केवी के नए जीएसएस का निर्माण कार्य जोरों पर हैं। सूत्रों के मुताबिक जिन स्थानों पर वोल्टेज कम व अधिक होने की समस्या है। उन जगहों को चिन्हित कर निगम की ओर से अलग से पॉवर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए गए हैं। जहां पर एलटी लाइन की जरुरत हैं। वहां लाइन भी बिछाई जा रही है। इसी कड़ी में कुछ जगहों पर क्रॉसिंग में भूमिगत केबल भी बिछाई जा रही जीएसएस के चालू होने पर ट्रिपिंग, वोल्टेज एवं बिजली सप्लाई में सुधार हो सकेगा। इस योजना के तहत करीब साढ़े तीन लाख लोग लाभान्वित होंगे।
यहां लगाए गए हैं पॉवर ट्रांसफॉर्मर : बिजली निगम की ओर से जहां ट्रांसफॉर्मरों पर लोड़ अधिक है और वोल्टेज कम- अधिक होने की समस्या है। ऐसी जगहों का सर्वे करके चिन्हिकरण किया गया।
इसमें प्रमुख रूप से बरसाना, गांधी नगर(मीणा छात्रावास के समीप), कुम्हार मोहल्ला, बडियाल रोड खुर्रा का बास, जोधपुरिया, वृंदावन विहार कॉलोनी सिकंदरा रोड, झालानी बगीची के पास एवं कुटी पर पॉवर ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं। इसमें 100 एवं 160 किलोवॉट के ही ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं। खास बात यह है कि वर्तमान में शहर में करीब 200 ट्रांसफॉर्मर लगे हुए हैं, लेकिन लोड़ बढऩे से बिजली सप्लाई में वोल्टेज की समस्या उपभोक्ताओं के लिए परेशानी बनी हुई थी, लेकिन जीएसएस चालू होने पर बिजली निर्बाध रूप से मिल सकेगी। (ए.सं.)
अलग से ये बनाए हैं फीडर
बिजली निगम सूत्रों के मुताबिक श्यालावास खुर्द में 33/11 केवी के जीएसएस का निर्माण होने के साथ ही तीन नए फीडरों का भी निर्माण किया जा रहा है। इसमें मुख्य बाजार एवं बाढ़बगीची गुढ़ारोड का अलग फीडर व जलदाय विभाग पम्प हाउस एवं नलकूपों के लिए अलग फीडर बनाया जाएगा। क्योंकि अभी जलदाय विभाग का अलग से फीडर नहीं है। ऐसे में तेज अंधड़ आने व फॉल्ट आने पर शहर की बिजली गुल होने के साथ ही जलदाय विभाग की बोरिंग भी बंद हो जाती है। इससे पानी सप्लाई भी बाधित होने से लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे में अलग से फीडऱ बनाए जाने पर पानी सप्लाई में भी सुधार होगा।