देहरादून

नहीं मिल रही दुल्हन : 7 हजार कुंवारे 49 की उम्र पार, 35 साल के हो गए 35000 युवा

Worrying Situation : शादी के इंतजार में सात हजार से अधिक कुंवारे 49 साल की उम्र तक पहुंच गए हैं। इतना ही नहीं करीब 35 हजार कुंवारे भी शादी के इंतजार में 34 की उम्र पार कर चुके हैं। ये सरकारी आंकड़े काफी हैरान करने वाले हैं।
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Apr 09, 2026
Due to the declining sex ratio, bachelors in Uttarakhand are unable to find brides
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक फोटो

Worrying Situation : पूरे देश और दुनिया में नए वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहे उत्तराखंड के युवाओं के लिए जीवनसाथी की तलाश बड़ी चुनौती बनती जा रही है। शादी के इंतजार में कई कुंवारे युवावस्था को पार कर अधेड़ उम्र में पहुंच चुके हैं। राज्य के सीमांत पिथौरागढ़ और चम्पावत जिले में विवाह योग्य लड़कियों की कमी के चलते लोग पड़ोसी देश नेपाल में जीवनसाथी तलाश रहे हैं। विवाह योग्य लड़कियों की कमी का संकट अब प्रदेश की राजधानी देहरादून तक पहुंच चुका है। देहरादून के जिला अर्थ एवं संख्यिकी विभाग ने जो रिपोर्ट पेश की है वह वास्तव में चौंकाने वाली है। डीएसटीओ की रिपोर्ट के अनुसार देहरादून में 25 से 34 साल तक की उम्र के विवाह योग्य तीन लड़कों पर महज एक लड़की है। दून में शादी के इंतजार में 35 की उम्र पार कर 49 वर्ष तक पहुंच गए युवकों की संख्या 7025 है। इनमें से भी 3281 युवक 40 की उम्र पार चुके हैं। साथ ही पहाड़ के कई गांव ऐसे हैं जहां माता-पिता अपने जवान बेटों के लिए लड़कियां तलाशते-तलाशते थक गए हैं।

35 हजार लड़के, लड़कियां 10000

देहरादून में 25 से 29 साल की उम्र के बड़ी संख्या में युवा शादी के इंतजार में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लड़कों की संख्या 35 हजार के पार है। इस उम्र की लड़कियां महज 11836 हैं। 30 से 34 साल की उम्र के बीच भी कमोबेश यही स्थिति हैं। इस आयु सीमा के युवाओं की संख्या 10103 है जबकि लड़कियों की संख्या में मात्र 3031 है। दून में ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं जो रिटायरमेंट की उम्र बीतने के बाद भी तन्हा हैं। राजधानी में 60 से 80 वर्ष के 5714 पुरुष ऐसे हैं जो एकाकी जीवन जी रहे हैं। इस तरह की महिलाओं की संख्या की 2968 है।

लिंगानुपात में आया भारी अंतर

उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में बीते कछ वर्षों में लिंगानुपात में भारी अंतर आ गया है। इस समस्या का ठीकरा अक्सर बेटियों के सिर फोड़ा जाता है। तर्क दिया जाता है कि लड़कियां अपने भावी पति से सरकारी नौकरी के साथ देहरादून और हल्द्वानी जैसे महानगरों में घर या प्लॉट की भी उम्मीद कर रही हैं। सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट बताती है कि बेटियों पर लग रहे आरोप बेमानी हैं। असल समस्या लिंगानुपात में भारी अंतर है।

चमोल गांव में 35 कुंवारे

घटता लिंगानुपात चिंता का विषय बन चुका है। टिहरी जिले के चमोल गांव भी काफी सुर्खियों में रहा था। इस छोटे से गांव में 35 लोग लंबे समय से दुल्हन के इंतजार में कुंवारे हैं। ये लड़के काफी पढ़े लिखे हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी उन कुंवारों को दुल्हन नहीं मिल पाई। इसी के चलते अब उनके लिए रिश्ते खोजने का अभियान भी बंद कर दिया गया है।  ग्रामीण इसे लेकर तमाम तर्क दे रहे हैं। हालांकि पहाड़ में सड़क, स्वास्थ्य शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी इसकी बड़ी वजह है। कई लड़कियां शादी के बाद पहाड़ में नहीं रहना चाहती हैं।

Updated on:
09 Apr 2026 07:53 am
Published on:
09 Apr 2026 07:53 am
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