
कारगिल विजय दिवस 2026 (पत्रिका फाइल फोटो)
Kargil Vijay Diwas 2026: कारगिल विजय दिवस देश के लिए शौर्य, बलिदान और अदम्य साहस का सबसे बड़ा प्रतीक है। 26 जुलाई, 1999 भारतीय सैन्य इतिहास की वह गौरवशाली तारीख है जब हमारी सेना ने ऑपरेशन विजय को पूरा करते हुए पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ दिया था। भारत और पाकिस्तान के बीच 60 दिनों तक चले इस युद्ध में देवभूमि उत्तराखंड के वीर जवानों ने भी अदम्य साहस दिखाया। इस युद्ध में भारतीय सेना के कुल 527 सैनिक शहीद हुए थे जिनमें से 75 जांबाज अकेले उत्तराखंड के थे। आज पूरा प्रदेश अपने उन वीर-सपूतों को याद कर रहा है, जिन्होंने तिरंगे की शान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के वीरों का जिक्र आते ही मेजर विवेक गुप्ता का नाम पूरे सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने राजपूताना राइफल्स के साथ तोलोलिंग की सबसे कठिन लड़ाई का नेतृत्व किया और वीरगति हासिल की। उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। इसी तरह मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने भी तोलोलिंग क्षेत्र में असाधारण नेतृत्व का परिचय दिया। उन्हें भी मरणोपरांत महावीर चक्र से नवाजा गया। इन अधिकारियों ने साबित कर दिया कि भारतीय सेना के अफसर हमेशा अपने जवानों के साथ अग्रिम मोर्चे पर डटे रहते हैं।
कारगिल युद्ध की सबसे भावुक यादों में लैंसडौन स्थित गढ़वाल रेजीमेंटल सेंटर का वह दृश्य शामिल है, जब वहां एक साथ 9 बलिदानियों के पार्थिव शरीर पहुंचे थे। तिरंगे में लिपटे अपने वीर-सपूतों को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। हर आंख में आंसू थे फिर भी हर दिल देशप्रेम और गर्व से भरा था। इस युद्ध में गढ़वाल राइफल्स के 47 जवान बलिदान हुए जिनमें से 41 उत्तराखंड से थे। वहीं कुमाऊं रेजीमेंट के 16 जवानों ने भी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।
गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने द्रास बटालिक मशकोह और कारगिल सेक्टर की खून जमा देने वाली ठंड और दुर्गम चोटियों पर दुश्मन का डटकर सामना किया। प्रदेश के सैनिकों को उनके उत्कृष्ट पराक्रम के लिए कुल 39 वीरता पदकों से सम्मानित किया गया। उत्तराखंड को वीरभूमि यूं ही नहीं कहा जाता है। यहां के सीमांत गांवों से लेकर शहरों तक कई परिवार ऐसे हैं जिनकी पीढ़ियां सेना में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को नमन किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के जांबाज सैनिकों ने कारगिल की दुर्गम चोटियों पर अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन को खदेड़ा था। राज्य के 75 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी जिन पर पूरे प्रदेश और देश को हमेशा गर्व रहेगा।
CM धामी ने कहा कि इन अमर बलिदानियों की शौर्य गाथाएं हमारी आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए सदैव प्रेरित करती रहेंगी। उत्तराखंड की वीरभूमि का हर सैनिक तिरंगे की शान के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार रहता है। देश की सीमाओं की रक्षा के लिए दिया गया हमारे जांबाजों का यह बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा।
Updated on:
26 Jul 2026, 4:56 PM IST
Published on:
26 Jul 2026, 4:50 PM IST
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