
चंपत राय (फोटो-ANI)
Ram Mandir Donation Theft Controversy : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अयोध्या में चातुर्मास के दौरान एक विशेष अनुष्ठान का संकल्प लिया है। 80 वर्षीय चंपत राय शनिवार से अपनी इस आध्यात्मिक साधना में जुट गए हैं। बीते दिनों मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवादों और आरोपों से घिरे चंपत राय ने अब पूरी तरह से भगवान राम की शरण ले ली है। उन्होंने आत्मिक शांति और कलंक मुक्ति के लिए रोजाना 6 घंटे तक मौन रहने का फैसला किया है। चंपत राय आगामी 21 नवंबर को देवोत्थान एकादशी तक अयोध्या से बाहर नहीं जाएंगे।
चंपत राय ने अयोध्या में ही रहकर चार महीने की चातुर्मास साधना शुरू कर दी है। हिंदू धर्म में चातुर्मास का बहुत अधिक महत्व होता है। चातुर्मास आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद पवित्र काल माना जाता है। यह वह समय होता है जब साधु-संत और श्रद्धालु एक ही स्थान पर रुककर तप, ध्यान और स्वाध्याय करते हैं। बताया जा रहा है कि चंपत राय अगले 4 महीने तक अयोध्या से बाहर नहीं जाएंगे और पूरी तरह से आध्यात्मिक अनुष्ठानों में अपना समय व्यतीत करेंगे।
शनिवार को अनुष्ठान के पहले दिन चंपत राय ने संकल्प लिया कि वह हर दिन सुबह 6 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक पूरी तरह मौन रहेंगे। फिलहाल यह संकल्प एक महीने के लिए लिया गया है। इस दौरान वह अपना पूरा समय रामचरितमानस के पाठ और राम मंत्र के निरंतर जाप में बिताएंगे। उन्होंने बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग खत्म कर दिया है और बहुत ही सीमित लोगों से मुलाकात करने का निर्णय लिया है।
बता दें कि पिछले लगभग 1 महीने से चंपत राय सार्वजनिक कार्यक्रमों से बिल्कुल दूर हैं। उन्हें आखिरी बार 23 जून को शेषावतार मंदिर में ध्वजारोहण की तैयारियों का जायजा लेते हुए देखा गया था। उसके अगले दिन से ही वह राम मंदिर परिसर से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित तीर्थ क्षेत्र भवन में रह रहे हैं।
चढ़ावा विवाद के बाद से ही ट्रस्ट और चंपत राय को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही थीं। इन सबके बीच चंपत राय का दृढ़ विश्वास है कि अब केवल भगवान श्रीराम ही उन्हें इन सभी आरोपों और कलंक से मुक्त करेंगे। इसी अटूट आस्था के साथ उन्होंने यह कठोर साधना शुरू की है। दूसरी तरफ, अयोध्या के कई संतों और व्यापारी समाज ने भी उनके इस कदम के बीच तीर्थ क्षेत्र भवन पहुंचकर चंपत राय के प्रति अपना पूरा समर्थन और विश्वास जताया है। राम मंदिर विवाद के बीच चंपत राय के इस आध्यात्मिक कदम को बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि यह एक विशुद्ध धार्मिक प्रक्रिया है और इसका किसी विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
Updated on:
26 Jul 2026, 12:40 PM IST
Published on:
26 Jul 2026, 12:40 PM IST
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