
Jantar Mantar CJP Protest Update (File Photo Patrika)
Constable Sher Singh: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस के पिथौरागढ़ जिले में तैनात कांस्टेबल शेर सिंह अचानक चर्चा में आ गए। प्रदर्शन के दौरान CJP के मंच पर पहुंचकर उसने सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान शेर सिंह ने अपना पुलिस बैज उतार कर अभिजीत दीपके को थमाते हुए दावा किया कि वह पुलिस की नौकरी छोड़कर छात्रों के समर्थन में आंदोलन से जुड़ेगा। उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसी बीच अब उत्तराखंड पुलिस ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान जारी किया है।
सिपाही शेर सिंह पुलिस व्यवस्था और सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उसने कहा कि जब इतिहास में पूछा जाएगा कि 20 जुलाई के जलियांवाला बाग जैसे घटनाक्रम के वक्त हम लोग कहां थे तो ये युवा इंकलाब का नारा देंगे। शेर सिंह का मानना है कि लोकतंत्र में तंत्र और मीडिया इन मासूम आंदोलनकारियों को जबरदस्ती नक्सली, आतंकवादी, माओवादी और खालिस्तानी घोषित करने में जुटा हुआ है जो कि पूरी तरह से गलत है। उसने भावुक होते हुए कहा कि जब देश ही नहीं बचेगा तो वह इस पुलिस की नौकरी का क्या करेगा। उसका कहना है कि देश किसी एक पार्टी से नहीं बल्कि इन युवाओं, माताओं और बहनों से मिलकर बनता है।
शेर सिंह ने दावा किया कि वह कॉकरोचों और युवाओं की रक्षा करने के लिए जंतर-मंतर आया है। उसने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह आधिकारिक रूप से अपना इस्तीफा देता है तो उसके पीछे हजारों अन्य सिपाही भी इस्तीफा देने को तैयार बैठे हैं। इसका कारण बताते हुए उसने कहा कि पुलिसकर्मियों के परिवारों और उनके बच्चों को भी डंडे मारे गए हैं। शेर सिंह ने आरोप लगाया कि कई अधिकारी सत्ता के दबाव में आकर निहत्थे छात्रों और युवाओं पर बर्बर तरीके से लाठियां बरसा रहे हैं। उसने अधिकारियों पर तंज कसते हुए एक शायरी भी पढ़ी और कहा अपने संबोधन में उन्होंने शहीद भगत सिंह का जिक्र करते हुए कहा, "जिंदगी अपने दम पर जी जाती है, क्रांति विचारों से आती है, अगर अपने हक के लिए लड़ना बगावत है, तो हम बागी हैं।"
शेर सिंह के बयान के बाद उत्तराखंड पुलिस की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई। कुमाऊं रेंज की IG निवेदिता कुकरेती ने बताया कि शेर सिंह 28 जून, 2026 से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे थे। इस संबंध में उन्हें नोटिस जारी किया गया था। जवाब नहीं मिलने पर 20 जुलाई, 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया गया।
आईजी ने यह भी कहा कि शेर सिंह के खिलाफ पहले से आपराधिक मामला दर्ज है। आरोप है कि वह एक अन्य पुलिसकर्मी के साथ मिलकर एक कुख्यात अपराधी के संपर्क में थे और लोगों को धमकाकर जमीन कब्जाने के मामले में गिरफ्तार किए गए थे। उन्हें 15 जनवरी, 2025 को जेल भेजा गया था और फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया पहले से चल रही है।
शेर सिंह के बयान और उत्तराखंड पुलिस की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर प्रदर्शनकारी उनके समर्थन वाले बयान को साझा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने उनके दावों और सेवा संबंधी स्थिति को लेकर अपना आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक किया है।
Updated on:
24 Jul 2026 10:54 pm
Published on:
24 Jul 2026 10:54 pm
